जम्मू-कश्मीर में दूध के क्षेत्र में विकास की योजना भारत सरकार की तरफ से तैयार की जा रही है।
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में दूध के क्षेत्र में विकास की योजना भारत सरकार की तरफ से तैयार की जा रही है। जानकारी दें कि इस काम में सरकार को गुजरात कॉपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) अपना पूरा सहयोग देगा। आप इस बात से पूरी तरह अवगत होंगे कि जीसीएमएमएफ अमूल नाम से देश भर में दूध की सप्लाई करता है। हाल ही में जीसीएमएमएफ के प्रबंधकों ने कश्मीर के राज्यपाल से मुलाकात भी की है। कश्मीर में धारा 370 के प्रावधानों को हटने के बाद वहां डेयरी उद्योग में एक नई उम्मीद जगी है। हालांकि जानकारी के मुताबिक जीसीएमएमएफ के प्रबंधकों ने कश्मीर के उच्च स्तरीय अधिकारियों से भी मुलाकात की है और कश्मीर के डेयरी जगत में तकनीक सपोर्ट के साथ प्रबंधन एवं दूध खरीदारी सिस्टम को डेवलप करने की इच्छा जताई है।

जीसीएमएमएफ की मदद से डेयरी क्षेत्र का तेजी से होगा विकास
जानकारी दें कि फिलहाल कश्मीर में डेयरी उद्योग से जुड़े लोग काफी कम कमा पाते हैं। मंत्रालय के मुताबिक कश्मीर में धारा 370 के हटने के बाद जीसीएमएमएफ की मदद से डेयरी क्षेत्र का तेजी से विकास होगा। इस साल 5 जुलाई को पेश बजट में भी केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के विकास की घोषणा की थी।
50,000 लीटर दूध को प्रोसेस करने की क्षमता
जानकारी के मुताबिक जीसीएमएमएफ की तरफ से जम्मू-कश्मीर के किसानों को डेयरी उद्यमी के तौर पर विकसित किया जाएगा और उन्हें हर प्रकार की सहायता दी जाएगी। कॉर्पोरेटिव मॉडल पर वहां मवेशियों के खाद्य पदार्थ बनाने का काम शुरू किया जाएगा। साथ ही दूध की खरीदारी उसकी प्रोसेसिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था भी कॉर्पोरेटिव तरीके से होगा। सरकार से मदद नहीं मिलने की वजह से जम्मू-कश्मीर में डेयरी उद्योग का विकास नहीं हो सका। अब तक वहां सिर्फ दो प्रोसेसिंग यूनिट काम कर रही है। इसकी प्रोसेसिंग क्षमता प्रतिदिन 50,000 लीटर दूध को प्रोसेस करने की है।
बिना पैक के दूध की बिक्री
बता दें कि कश्मीर की महिलाएं सेल्फ हेल्प ग्रुप के माध्यम से डेयरी के क्षेत्र में काम कर रही है। प्रोसेसिंग यूनिट से प्रोसेस्ड 20-25 हजार लीटर दूध को जेकेएमपीसीएल प्रतिदिन खरीदता है जिसे स्नो कैप के नाम से बेचा जाता है। श्रीनगर एवं आसपास के इलाकों में बिना पैक के दूध की बिक्री की जाती है, लेकिन अभी इन इलाकों में दूध की बिक्री के लिए काफी बड़ा बाजार है। इस बाजार में बटर, चीज, आइसक्रीम एवं पनीर की बिक्री के लिए काफी बड़ा बाजार मौजूद है।
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