अब नहीं बनेंगे 1000 रुपए के नोट, जानिए क्‍यों

आरबीआई ने एक हजार रुपए का नोट जारी करने की अनुमति देने वाले 1999 के कानून को संसद ने निरस्त कर दिया है।

जम्‍मू-कश्‍मीर में एक ओर जहां धारा 370 के हटने जैसी बड़ी खबर से देश में खुशहाली सी छा गई है तो वहीं दूसरी ओर भारतीय रिजर्व बैंक ने 1 हजार रुपए का नोट जारी करने की मंजूरी देने वाला कानून को खत्‍म करने का बड़ा फैसला लिया है। जी हां आरबीआई ने एक हजार रुपए का नोट जारी करने की अनुमति देने वाले 1999 के कानून को संसद ने निरस्त कर दिया है। बता दें कि अर्थव्यवस्था में करेंसी नोटों की तंगी को दूर करने के लिए उस समय यह कानून लाया गया था।

आपको बता दें कि संसद ने पिछले सप्ताह ही इस कानून सहित बेकार हो चुके 58 पुराने कानूनों को समाप्त करने को मंजूरी दे दी है। इनमें से कुछ कानून डेढ़ सौ साल पुराने थे। इनमें एक हजार रुपए का नोट जारी करने की अनुमति देने वाला उच्च मूल्य वर्ग बैंक नोट (विमुद्रीकरण) संशोधन अधिनियम 1998 भी शामिल है।

यशवंत सिन्हा ने पेश किया था विधेयक

यशवंत सिन्हा ने पेश किया था विधेयक

बता दें तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने दिसंबर 1998 में इस संबंध में संशोधन विधेयक पेश किया था। वर्ष 1978 के कानून में किए गए इस संशोधन के जरिये नोटों की किल्लत को दूर करने और दूसरे मूल्यवर्ग के नोटों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए जरूरी संशोधन किया गया। इसके जरिये रिजर्व बैंक के लिए 1,000 रुपए का नोट जारी करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। फिलहाल, अब यह समाप्त कर दिया गया है।

2016 में हटा दी गई थी 1 हजार की नोट

2016 में हटा दी गई थी 1 हजार की नोट

जैसा कि आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा करते हुए महात्मा गांधी सीरीज के 500 और 1000 रुपए के नोटों को चलन से हटा दिया था। इसके साथ ही उन्होंने 500 रुपए और 2,000 रुपए के नए नोट जारी करने की भी घोषणा की। एक हजार रुपए का नोट चलन में नहीं रहा।

अब तक 1428 कानून खत्म किए जा चुके

अब तक 1428 कानून खत्म किए जा चुके

इस बारे में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने संसद में कहा था कि इस विधेयक के जरिए पुराने पड़ चुके कानूनों, जिनकी प्रासंगिकता खत्म हो गई है, को समाप्त किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश के बाद सरकार ने फैसला किया था कि अप्रासंगिक हो चुके कानूनों को समाप्त किया जाएगा। इसके लिए एक समिति बनायी गयी थी। इस समिति ने 1824 कानूनों की पहचान की थी और ये अब तक 1428 कानून खत्म किए जा चुके हैं।

 

इन कानूनों को भी समाप्‍त करने का प्रावधान

इन कानूनों को भी समाप्‍त करने का प्रावधान

तो वहीं निरसन विधेयक के माध्यम से जिन 58 पुराने और अप्रचलित कानूनों को समाप्त करने का प्रस्ताव किया गया है, उनमें लोक लेखपाल डिफ़ॉल्ट अधिनियम 1850, नगरपालिता कराधान अधिनियम 1881, रेल यात्री सीमा कर अधिनियम 1892, रेल यात्री सीमाकर अधिनियम 1892, हिमाचल प्रदेश विधानसभा गठन और कार्यवाहियाँ विधुतिकरण अधिनियम 1958, हिन्दी साहित्य सम्मेलन संशोधन अधिनियम 1963 शामिल है।

इसके अलावा इनमें एलकाक एशडाउन कंपनी लिमिटेड उपक्रमों का अर्जन अधिनियम 1973, दिल्ली विश्वविद्यालय संशोधन अधिनियम 2002 भी शामिल है। इनके अलावा इनमें धनशोधन निवारण संशोधन अधिनियम 2009, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल संशोधन अधिनियम 2009, नागरिक सुरक्षा संशोधन अधिनियम 2011, प्रौद्योगिकी संस्थान संशोधन अधिनियम 2012, वाणिज्यिक परिवहन संशोधन दूसरा संशोधन अधिनियम 2014, बीमा विधि संशोधन अधिनियम 2015, निर्वाचन विधि संशोधन अधिनियम 2016 भी शामिल हैं।

 

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