आम्रपाली मामले से आप सभी अवगत तो होंगे ही, तो आपको बता दें कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी आम्रपाली मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। जी हां आम्रपाली बिल्डर पर उनके लगभग 5,400 करोड़ रुपये बकाया हैं। पिछले महीने कोर्ट ने आम्रपाली पंजीकरण को कैंसल कर दिया था और दोनों शहरों में एनबीसीसी को हाउसिंग प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए कहा था।

साथ ही उसी समय, सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को दोनों अथॉरिटी के आम्रपाली के हाउसिंग प्रोजेक्ट पर किसी तरह के दावे पर रोक लगा दी थी। इसके बजाए कोर्ट ने अथॉरिटी से डिवलेपर की दूसरी संपत्ति को बेचकर उसे अपनी बकाया राशि वसूलने के लिए कहा। इसके अलावा कोर्ट ने अथॉरिटी को इशू कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने और एक महीने के अंदर त्रिकोणीय समझौते को पूरा करने के लिए कहा, जहां होमबायर्स रह रहे हैं, इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें पानी और बिजली मुहैया कराने के लिए भी कहा।
फिलहाल, अधिकारियों का कहना है कि डेवलपर्स की कीमत इतनी नहीं है, जिससे उनके बकाया क्लियर हो सकें। इसलिए 9 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई से पहले वे इस बकाया राशि को लेकर एक अप्लीकेशन फाइल करना चाहते हैं।
इस पर नोएडा अथॉरिटी की सीईओ रितु महेश्वरी ने कहा है कि हमें इस बात पर अधिक स्पष्टता की जरूरत है कि हमारी बकाया राशि का भुगतान कैसे होगा, रजिस्ट्री के लिए कौन आवेदन करेगा और कंप्लीशन सर्टिफिकेट कैसे और किसको जारी करेगा। हमारी कानूनी टीम रिप्रजेंटेशन पर काम कर रही है जो ट्रायल की अगली तारीख को होगी। उन्होंने आगे कहा कि 8 सदस्यों की नोडल टीम बनाई गई है जो नई रजिस्ट्री और बायर्स के मुद्दे पर काम करेगी। फैसले के अनुसार बिजली और पानी के लिए हमने उनसे संबंधित डिपार्टमेंट को चिट्ठी भेज दी है।
इसके अलावा इसी तरह ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ नरेंद्र भूषण ने बताया, कि हमारी लीगल टीम जजमेंट को रिव्यू कर रही है। कुछ सेक्शन में हमें शंका है। हमें अभी भी यह तय करना है कि हम अपने भविष्य के कार्यों के बारे में क्या करेंगे।


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