किसान हमेशा घाटे में ही रहता है कभी ज्यादा बारिश, तो कभी कम, पाला तो कभी सूखा पड़ने सक उनकी सारी मेहनत बेकार चली जाती है।
किसान हमेशा घाटे में ही रहता है कभी ज्यादा बारिश, तो कभी कम, पाला तो कभी सूखा पड़ने सक उनकी सारी मेहनत बेकार चली जाती है। तभी तो कम बारिश के कारण खरीफ मौसम की सभी फसलों की बुवाई में गिरावट देखी गई है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अब तक खरीफ के मौसम में धान का रकबा 223.5 लाख हेक्टेयर और दलहन का रकबा 105.14 लाख हेक्टेयर रहा है। खरीफ की फसल की बुवाई दक्षिण पश्चिमी मानसून की शुरुआत से होती है। वहीं इनकी कटाई अक्टूबर के बाद होती है। तो वहीं मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 2019-20 में खरीफ की मुख्य फसल धान की अब तक 223.53 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है। पिछले साल इसी फसली वर्ष में (जुलाई-जून) में यह आंकड़ा 255.48 लाख हेक्टेयर रहा।

साथ ही दलधन की बुवाई समीक्षावधि में 105.14 लाख हेक्टेयर रही जो पिछले साल इस अवधि में 113.74 लाख हेक्टेयर थी। जबकि मोटे अनाज का रकबा 136.17 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल इस दौरान 145.16 लाख हेक्टेयर था। तिलहन की बुवाई में भी कमी देखी गई है। इस बैठक में अब तक 149.49 लाख हेक्टेयर में तिलहन की बुवाई हुई है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 157.39 लाख हेक्टेयर रही थी। सब्जियों की फसल में गन्ना और जूट का रकबा भी है। फिलहाल, कपास का रकबा ऊंचा बना हुआ है। इस दौरान 52.30 लाख हेक्टेयर में गन्ने की रोपाई हुई जो पिछले साल इसी अवधि में 55.45 लाख हेक्टेयर थी। तो वहीं जूट 6.83 लाख हेक्टेयर में है, जो पिछले साल इस दौरान 7.19 लाख हेक्टेयर था।
इसके अलावा खरीफ की फसलों का कुल रकबा इस दौरान 788.52 लाख हेक्टेयर रहा है, जो पिछले साल इसी अवधि में 844.20 लाख हेक्टेयर था। विशेषज्ञों की नजर में मानसून आने में देरी की वजह से बुवाई गतिविधियों में देरी हुई। इसके अलावा वहां कुछ क्षेत्रों में जुलाई अंत तक बारिश में नौ प्रतिशत की गिरावट आने से बुवाई तेज नहीं हो सकी। मौसम विभाग के अनुसार पिछले दो महीनों में कुल मानसूनी वर्षा में नौ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
तो वहीं मणिपुर, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, गुजरात, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में बारिश में गिरावट दर्ज की गई है।


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