मंगलवार को संसद के निचले सदन ने वेज कोड बिल पारित किया, जिससे केंद्र सरकार पूरे देश के लिए न्यूनतम वैधानिक वेतन तय कर सकेगी और 50 करोड़ श्रमिकों को लाभ होने की उम्मीद है।
मंगलवार को संसद के निचले सदन ने वेज कोड बिल पारित किया, जिससे केंद्र सरकार पूरे देश के लिए न्यूनतम वैधानिक वेतन तय कर सकेगी और 50 करोड़ श्रमिकों को लाभ होने की उम्मीद है। देशभर में विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए सरकार न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करेगी। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि श्रमिकों के वेतन में भेदभाव को भी दूर किया जाएगा। मजदूरी संहिता विधेयक -2019 में ये प्रावधान किए गए हैं। मंगलवार को यह विधेयक लोकसभा में पारित हो गया।

आपको बता दें केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने सदन में इस विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इससे देश के 50 करोड़ कामगारों को लाभ मिलेगा। न्यूनतम वेतन के साथ ही श्रमिकों को समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों को शामिल करने के लिए यह विधेयक तैयार किया गया है। विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में हर पांच साल बाद संशोधन किया जाएगा।
बता दें राज्यों में अलग-अलग न्यूनतम वेतन हैं। यह बिल में न्यूनतम वेतन तय करने की प्रणाली को युक्तिसंगत बनाया गया है। रोजगार के विभिन्न प्रकारों को अलग-अलग करके न्यूनतम वेतन के निर्धारण के लिए एक ही मानदंड बनाया गया है।
तो वहीं विधेयक में कार्यस्थलों के निरीक्षण की व्यवस्था में कई बदलाव किए गए हैं। जिसमें वेब आधारित कंप्यूटरीकृत निरीक्षण योजना, अधिकार क्षेत्र मुक्त निरीक्षण, इलेक्ट्रॉनिक रूप से जानकारी मांगना और जुर्माने का प्रावधान शामिल है।
तो वहीं कांग्रेस ने इस विधेयक को श्रमिक विरोधी करार दिया है। बता दें कि पार्टी के सांसद के सुरेश ने चर्चा के दौरान कहा कि श्रमिक संगठनों से बातचीत किए बिना जल्दबाजी में यह विधेयक लाया गया है। साथ ही श्रमिक संगठन बिल का विरोध कर रहे हैं।


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