नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज (NBFCs) की चल रही लक्विडिटी क्राइसिस के बीच इंडसइंड बैंक के सीईओ रमेश सोबती ने आशंका जताई है कि सेक्टर की एक या दो कंपनियां डूब सकती हैं।
नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज (NBFCs) की चल रही लक्विडिटी क्राइसिस के बीच इंडसइंड बैंक के सीईओ रमेश सोबती ने आशंका जताई है कि सेक्टर की एक या दो कंपनियां डूब सकती हैं। रमेश सोबती ने इकोनॉमिक्स टाइम्स में इंटरव्यू के दौरान कहा है कि एनबीएफसी सेक्टर एक फ्री मार्केट है। यहां कोई मदद के लिए आगे क्यों जाएगा? उन्होंने कहा कि रेगुलेटर कई बार ये कह चुके हैं कि ये क्राइसिस सिस्टम की समस्या नहीं है, ऐसे में मदद की उम्मीद नहीं है। मदद अच्छे पोर्टफोलियो परचेज के रूप में आता है।

उन्होंने कहा कि NBFC सेक्टर की कंपनियों कंजम्पशन डिमांड को ड्राइव करती हैं, ऐसे में अगर वो पहले की तरह एक्टिव नहीं रहेंगी तो उनकी जगह कौन लेगा? तो वही उधर खबर है कि देश के पांच बैंक मिलकर 62,000 करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं, इससे इन बैंकों को एनबीएफसी के मार्केट शेयर हासिल करने में काफी दिक्कतें हैं।
तो वहीं इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के तीन बैंक- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक- और प्राइवेट सेक्टर के दो बैंक- एक्सिस बैंक और आरबीएल बैंक ने ग्रोथ को बढ़ावा देने के साथ कुल 62,000 करोड़ का फंड दिया बढ़ाने का फैसला किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एसबीआई बॉन्ड्स जारी करके 17,000 करोड़ रुपये की योजना बना रही है। इनमें से 7,000 करोड़ अतिरिक्त टीयर 1 पूंजी के तौर पर जुटा जाएंगे।
एक्सिस बैंक क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट्स और डिपॉजिटरी रसीद के माध्यम से 18,000 करोड़, आरबीएल बैंक 3,000-3,500 करोड़, केनरा बैंक इक्विडिटी और बॉन्ड्स मिक्स से 12,000 करोड़ और बैंक ऑफ बड़ेडा इम्पलॉई शेयर परचेज स्कीम और AT 1 बॉन्ड्स के जरिए 6,000 करोड़ जुटाएंगे।


Click it and Unblock the Notifications