भारतीय रेलवे की पहल, महिलाओं के लिए लाया पिंक ट्रेन कोच

मह‍िलाओं के सुव‍िधा के ल‍िए भारतीय रेलवे ने की बड़ा कदम उठाया है। वैसे तो देखा जाएं तो अब ज्यादातर सरकारी यातायात के साधनों में महिलाओं के लिए सीटें रिजर्व होती हैं।

नई द‍िल्‍ली: मह‍िलाओं के सुव‍िधा के ल‍िए भारतीय रेलवे ने की बड़ा कदम उठाया है। वैसे तो देखा जाएं तो अब ज्यादातर सरकारी यातायात के साधनों में महिलाओं के लिए सीटें रिजर्व होती हैं। लेकिन इसके बाद भी जब जनरल डिब्बे में महिलाओं के यात्रा करने की बात आती है तो वे बेहद मुश्‍किल लगता है। क्‍योंकि महिलाओं को बच्‍चों के साथ जनरल डिब्‍बे की भिड़भाड़ में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर तब जब वो अकेले ही यात्रा कर रहीं हो। ऐसे में जनरल डिब्बे में सुविधाजनक यात्रा उनके लिए आसान नहीं होती। इन सब परेशान‍ियों को देखते हुए रेलवे ने कदम उठाया है।

महिलाओं के लिए रिजर्व सीटें पहचानने में म‍िलेगा मदद

महिलाओं के लिए रिजर्व सीटें पहचानने में म‍िलेगा मदद

जी हां पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने जनरल डिब्बे में रेलयात्रा को महिला यात्रियों के लिए आसान और सुविधाजनक बनाने का फैसला किया है। महिला यात्रियों को जनरल डिब्बों में यात्रा के दौरान आसानी और सुरक्षा देने के लिए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने ट्रेन के जनरल डिब्बों को गुलाबी रंग से रंगना शुरू कर दिया है। यह रंग यात्रियों को महिलाओं के लिए रिजर्व सीटें पहचानने में मदद करेगा ताकि वे रिजर्व सीटों को न घेरें और भीड़भाड़ के वक्त भी महिलाओं को सीटें मिल सकें।

जनरल डिब्बों को गुलाबी रंग से रंगने का काम शुरू

जनरल डिब्बों को गुलाबी रंग से रंगने का काम शुरू

बता दें कि जनरल डिब्बों में अगर पूरे डिब्बे को महिलाओं के लिए घोषित किया गया है तो उसे गुलाबी रंग से रंग दिया जा रहा है। अगर डिब्बे के केवल एक हिस्से को महिलाओं के लिए रिजर्व किया गया है तो केवल उतने हिस्से को गुलाबी रंग से रंग दिया जा रहा है। न्यू बोंगाईगांव से गुवाहाटी जाने वाली कई ट्रेनों को ऐसे रंगा गया है। जबकि ऐसे ही रंगिया और मुरकॉन्गसेलेक के बीच चलने वाली ट्रेन को भी रंगा गया है। कुछ रेलगाड़ियों में, ट्रेन के कोच के अनुसार, एक ही कोच में महिलाओं और दिव्यांग लोगों के लिए डिब्बे के हिस्से रिजर्व कर दिए गए हैं।

मह‍िलाओं की सुरक्षा के ह‍ित में ल‍िया गया फैसला

मह‍िलाओं की सुरक्षा के ह‍ित में ल‍िया गया फैसला

इतना ही नहीं एनआरएफ मानता है कि यह नया कदम महिला यात्रियों की सुरक्षा और आराम के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। यह और ज्यादा महिलाओं को ट्रेन को यात्रा के माध्यम के तौर पर चुनने के लिए प्रेरित करेगा। ये महिलाएं इन डिब्बों में लंबी यात्राएं भी कर सकेंगीं। रेलवे अधिकारी इन कोच में अगले कुछ दिनों के लिए आरपीएफ और टिकट चेक करने वाले अधिकारियों की नियुक्ति भी करने वाले हैं ताकि इस नई व्यवस्था को पूरी तरह से स्थापित किया जा सके। जानकारी देना चाहेंगे कि कुछ महीने पहले देश भर के रेलवे के लिए इस प्लान को भारतीय रेलवे ने सामने रखा था लेकिन इसपर सबसे पहले पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने काम किया है।

ट्रेन की ट‍िकट फिंगर प्रिंट से भी बुक कर सकेंगे

ट्रेन की ट‍िकट फिंगर प्रिंट से भी बुक कर सकेंगे

हाल ही में यात्र‍ियों के सुविधा का ख्‍याल करते हुए एक अच्‍छी पहल की शुरूआत की है। इंडियन रेलवे में पहली बार टिकट के लिए बायोमीट्रिक सिस्टम का इस्तेमाल होगा। रेलवे मंत्रालय अनारक्षित डिब्बों या जनरल डिब्बों में बायोमीट्रिक सिस्टम से टिकट देने की शुरुआत कर रहा है। इससे यात्रियों को सीट मिलने में आसानी होगी, प्लेटफॉर्म पर टिकट लेने और ट्रेन पकड़ने और असामाजिक तत्वों की मनमानी से भी छुटकारा मिलेगा। ये पायलट प्रोजेक्ट वेस्टर्न रेलवे डिवीजन के मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन और बांद्रा टर्मिनल पर पहले ही शुरू कर दिया गया है। जानकारी दें कि इसके लिए दोनों स्टेशन्स पर 2-2 बायोमीट्रिक मशीन लगाए गए हैं।

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