बैंको के कर्ज को लेकर दिन व दिन समस्याएं बढ़ रही हैं।
बैंको के कर्ज को लेकर दिन व दिन समस्याएं बढ़ रही हैं। लेकिन आर्थिक वृद्धि में नरमी और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में संकट जारी रहने से उनकी संपत्ति (ऋण खातों) की गुणवत्ता के समक्ष नई कठिनाइयों के उत्पन्न होने के जोखिम हैं। आंतरिक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने एक रिपोर्ट में यह बात कही है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर मार्च तिमाही में पांच साल के न्यूनतम स्तर 5.8 प्रतिशत रहने के बीच यह रिपोर्ट आई है।

इस बारे में मूडीज ने कहा कि अगले एक से डेढ़ साल में वृद्धि दर कमजोर रहेगी। फिलहाल, रिपोर्ट में वृद्धि के बारे में कोई आंकड़ा नहीं दिया गया है। सरकार ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए वृद्धि दर 8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। मुडीज की वरिष्ठ साख विश्लेषक अलका अनबरासू ने सोमवार को आगाह करते हुए कहा कि बैंकों का परिचालन माहौल स्थिर बना रहेगा, लेकिन नरमी के कारण उनकी संपत्ति की गुणवत्ता को लेकर कठिनाइयां हैं।
उन्होंने कहा कि आर्थिक वृद्धि में नरमी से खुदरा क्षेत्र और छोटे और मझोले उद्यम खंडों में फंसे कर्ज की स्थिति में गिरावट हो सकती है।) एजेंसी ने कहा कि नरमी ऐसे समय में आई है, जब बैंक गैर-निष्पादित परिसंपत्ति से धीरे-धीरे बाहर आ रहे हैं। एक समय बैंकों का एनपीए 12 प्रतिशत तक पहुंच गया था, जो अब कम से कम 10 प्रतिशत से नीचे आ गया है।
अलका अनबरासु ने कहा कि कंपनी क्षेत्र में सुधार और पूर्व की ऋण समस्या से सुधार से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के नए फंसे कर्ज में कमी आएगी। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के बैंकों में पूंजीगत जाने से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को पूंजी स्तर मौजूदा स्तर पर बनाए रखने में मदद मिलेगी। कुछ निजी क्षेत्र के बैंक भी पार्कों से पूंजी बढ़ाने की प्रक्रिया में है।
साथ ही उन्होंने उन्होंने कहा कि पूरी व्यवस्था में लाभ की स्थिति सुधरेगी, लेकिन यह कमजोर रहेगा और वित्त पोषण और आपूर्ति स्थिर बनी रहेगी। उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक के अनुसार मार्च 2020 तक एनपीए 9.3 प्रतिशत से कम होकर 9 प्रतिशत पर आ जाने का अनुमान है। वहीं वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो 2018-19 में 6.8 प्रतिशत थी।


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