ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स के द्वारा विभिन्न देशों को अलग-अलग रैंकिंग प्रदान की जाती है। जिसके चलते इस बार ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की रैंकिंग पिछले साल के 5 पायदान ऊपर चढ़ी है।
किसी देश की खुद की क्षमता से प्राप्त सफलता के तहत ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स के द्वारा विभिन्न देशों को अलग-अलग रैंकिंग प्रदान की जाती है। जिसके चलते इस बार ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की रैंकिंग पिछले साल के 5 पायदान ऊपर चढ़ी है। पिछले साल भारत की रैंकिंग 57 थी, जो अब बेहतर होने के साथ 52 वीं हो गई है। भारत की बात करें तो स्टार्टअप के मामले में महाराष्ट्र, कर्नाटक और दिल्ली एक दूसरे को जोरदार चुनौती दे रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत 3783 रजिस्टर्ड स्टार्टअप के साथ महाराष्ट्र पहली पायदान पर है, तो वहीं कर्नाटक 2938 स्टार्टअप के साथ दूसरे स्थान पर है।

केंद्रीय एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को वैश्विक नवप्रवर्तन सूचकांक (जीआईआई) की रैंकिंग जारी की। जीआईआई रैंकिंग वार्षिक आधार पर कॉर्नेल विश्वविद्यालय इनसीड, संयुक्त राष्ट्र विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) और जीआईआई नॉलेज पार्टनर्स द्वारा प्रकाशित की जाती है।
तो वहीं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में कुल 20028 पंजीकृत स्टार्टअप है। इसके अलावा तेलंगाना में 1116 पंजीकृत स्टार्टअप हैं। जबकि दिल्ली में रजिस्टर्ड स्टार्टअप की संख्या 2634 है। इस सूची में उत्तर प्रदेश का चौथा स्थान है, जहां 1621 रजिस्टर्ड स्टार्टअप हैं।
बता दें कि सरकार ने स्टार्टअप इंडिया फंड के तहत देश भर में कुल 1701 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इनमें से सबसे अधिक फंडिंग कर्नाटक को मिली। कर्नाटक में 538 करोड़ रुपये की फंडिंग हुई। दूसरा स्थान महाराष्ट्र का रहा, जहां 489 करोड़ रुपये आए। दिल्ली में 253 करोड़ रुपये और हरियाणा को 120 करोड़ रुपये स्टार्टअप के तौर पर मिले। ये आंकड़े DPIIT ने जारी किए हैं। तो वहीं तमिलनाडू के खाते में 88 करोड़ रुपये आए हैं।
आपको जानना चाहिए कि केंद्र की मोदी सरकार का जोर देश में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने पर रहा है। इसके लिए पीएम मोदी ने स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इस कार्यक्रम के तहत स्टार्टअप को टैक्स छूट और फंडिंग जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।
इस बात का पहले से ही अनुमान लगाया जा रहा था कि रैंकिंग में सुधार होा। 2017 में भारत 60वें, 2016 में 66वें और 2015 में 81वें स्थान पर था।


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