आम्रपाली ग्रुप ने निजी इस्‍तेमाल के ल‍िए खर‍ीदा था गोल्‍ड

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आम्रपाली ग्रुप पर बड़ा फैसला ल‍िया है इसके बारे में आप पूरी तरह अवगत होंगे।

नई द‍िल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आम्रपाली ग्रुप पर बड़ा फैसला ल‍िया है इसके बारे में आप पूरी तरह अवगत होंगे। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से करीब 45 हजार फ्लैट खरीदारों को राहत म‍िली है। बता दें कि 23 जुलाई 2019 को बड़े रियल एस्टेट ग्रुप आम्रपाली पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ग्रुप के कई नए घोटाले सामने आ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में सामने आया है कि ग्रुप ने नोएडा के एक ज्वैलर यशिका डायमंड्स से 5.88 करोड़ की कीमत के गोल्ड बार्स खरीदे थे। ग्रुप ने ये सोने के बिस्किट निजी इस्तेमाल के लिए खरीदे थे। लेकिन बहीखाते में इसे त्यौहारी खर्च के तौर पर दिखाया गया। इसी के तहत सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि ये पैसे कंपनी के मैनेजमेंट से रिकवर किए जाएं।

Amrapali Group Bought Gold Bars Worth 5.88 crores From Jeweler Yashika Diamonds

रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में हुए रजिस्ट्रेशन के मुताबिक नोएडा के यशिका डायमंड्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर विनय गर्ग, हिमांशु गर्ग, रजनी गर्ग और यश गर्ग हैं। जानकारी दें कि ये कंपनी 20 मार्च, 2002 को बनाई गई थी। पब्लिक डोमेन में मौजूद जानकारी के मुताबिक इसका ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल 30,000,000 है, वहीं पेड अप कैपिटल 27,429,500 है।

कोर्ट ने अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का द‍िया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को ग्रुप के केस में सुनवाई करते हुए ग्रुप की सभी कंपनियों के आरईआरए रजिस्ट्रेशन को रद्द करने का आदेश दिया था। कोर्ट का कहना था कि ग्रुप ने होमबायर्स के साथ धोखाधड़ी की है। कोर्ट ने सरकारी नेशनल बिल्डिंग कन्स्ट्रक्शन कॉरपोरेशन को इन अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का आदेश दिया। कोर्ट के इस आदेश से 40,000 होमबायर्स को मदद मिलेगी। फॉरेंसिक ऑडिट में गोल्ड बार्स की खरीदारी की बात सामने आने पर कोर्ट ने कहा कि ये खरीददारी बिजनेस ट्रांजैक्शन से ज्यादा निजी इस्तेमाल के लिए की गई लगती है इसलिए इसकी कीमत कंपनी के मैनेजमेंट से रिकवर किया जाना चाहिए।

इस तरह हो रहा था घोटाला

कोर्ट के ऑर्डर पर हुई फोरेंसिक रिपोर्ट में पाया गया है कि ये रियल एस्टेट कंपनी हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए बनाए गए फंड्स को डमी कंपनीज, फेक बिल्स और अपार्टमेंट्स के दाम गिराकर डायवर्ट कर रही थी। कोर्ट के आदेश में प्रॉपर्टीज को ए, बी और सी कैटेगरी में बांटकर लिस्ट बनाया गया है। ए कैटेगरी की प्रॉपर्टीज को होमबायर्स के पैसे चुकाने के लिए बेचा जाएगा। बी कैटेगरी की संपत्तियां जब्त रहेंगी और सी कैटेगरीज की संपत्तियों को रिलीज कर दिया जाएगा।

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