रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) इस साल फरवरी के बाद से 3 बार ब्याज दरों में 25-25 बेसिस प्वॉइंट की कटौती कर चुका है।
नई दिल्ली: रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) इस साल फरवरी के बाद से 3 बार ब्याज दरों में 25-25 बेसिस प्वॉइंट की कटौती कर चुका है। इसके चलते कई सरकारी और निजी बैंकों ने भी दरों में कटौती की है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने आगे भी कम से कम एक और रेट के संकेत दिए हैं। उनका कहना है कि सेंट्रल बैंक ने अपना स्टांस न्यूट्रल से बदलकर अकोमोडेटिव कर दिया है, जिससे आगे भी रेट कट की बड़ी उम्मीद है।
ब्याज दरों में कम से कम 25 आधार अंकों की कटौती
जानकारी दें कि टाइम्स ऑफ इंडिया और ब्लूमबर्ग में सोमवार को प्रकाशित इंटरव्यू में दास ने यह भी कहा कि पॉलिसी डिसीजन भविष्य में आने वाले आंकड़ों पर निर्भर करेंगे। उनका कहना हैं कि हम रेपो रेट्स में 75 आधार अंकों की कमी कर चुके हैं और हम उदार रुख की ओर शिफ्ट हो चुके हैं। इसका मतलब है कि अब ब्याज दरों में कम से कम 25 आधार अंकों की कटौती हो सकती है। हालांकि एक्सपर्ट के मुताबिक ऐसा लगता है कि वह 25 आधार अंकों की एक से ज्यादा बार कटौती की बात कह रहे हैं। हालांकि दास आरबीआई के रेट कट को लाभ पब्लिक तक पहुंचने को लेकर ज्यादा चिंतित दिख रहे हैं। बता दें कि आरबीआई वर्ष 2019 की शुरुआत से अब तक 75 आधार अंकों की कटौती कर चुका है, जबकि बैंकों ने अपनी लेंडिंग रेट्स में 15-20 आधार अंकों की ही कमी की है।
मॉनिट्री पॉलिसी कमेटी की मीटिंग 7 अगस्त को
इस दौरान दास ने कहा कि आरबीआई को मिली भूमिका के तहत उसका पहला लक्ष्य महंगाई है। और इस पर भी उनकी नजर है कि ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ी है। रिवाइवल के लिए कई स्टेकहोल्डर्स को अपनी भूमिका निभानी है। आरबीआई की अगली मॉनिट्री पॉलिसी कमेटी की मीटिंग 7 अगस्त को होनी है। भारतीय बाजार 25 आधार अंकों की एक और कटौती की उम्मीद कर रहा है। सरकार ने जुलाई की शुरुआत में ही राजकोषीय घाटे का लक्ष्य को 3.4 फीसदी से घटाकर 3.3 फीसदी कर दिया था।
इस तरह हो सकता ग्राहकों पर असर
- जानकारी दें कि जिन ग्राहकों के लोन एमसीएलआर से जुड़े हैं, उनकी ईएमआई का बोझ कम होगा। इसके लिए जरूरी है कि बैंक एसीएलआर में कटौती करे। हालांकि, फायदा तभी से शुरू होगा जब लोन की रीसेट डेट आएगी। बैंक छह महीने या सालभर के रीसेट पीरियड के साथ होम लोन की पेशकश करते हैं। रीसेट डेट आने पर भविष्य की ईएमआई उस समय की ब्याज दरों पर निर्भर करेंगी।
- वहीं जिन ग्राहकों के लोन अब भी बेस रेट या बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (बीपीएलआर) से जुड़े हैं, उन्हें अपने होम लोन को एमसीएलआर आधारित व्यवस्था में स्विच कराने पर विचार करना चाहिए।
- जबकि नए होम लोन ग्राहक एमसीएलआर व्यवस्था में लोन ले सकते हैं। उनके पास एक्सटर्नल बेंचमार्क व्यवस्था का मूल्यांकन करने का भी विकल्प है।
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