लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट भाषण शुरू। पिछले 5 साल में कायाकल्प करने वाले काम हुए हैं।
नई दिल्ली: लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट भाषण शुरू। पिछले 5 साल में कायाकल्प करने वाले काम हुए हैं। हम अपने लक्ष्य को हासिल करेंगे। हाल ही में हुए चुनाव में एक उज्ज्वल और स्थिर 'न्यू इंडिया' की इच्छा का नतीजे आए। देश का हर व्यक्ति बदलाव महसूस कर रहा है। यकीन हो तो रास्ता निकलता है। डिजिटल इंडिया को हर क्षेत्र तक पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि 5 साल में काम में और तेजी लाएंगे। 5 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी बनाने की योजना है। अभी ये 3 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी है। पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का पहला कार्यकाल एक प्रदर्शनकारी सरकार के रूप में सामने आया। 2014-2019 के बीच उन्होंने एक कायाकल्प केंद्र-राज्य गतिशीलता, सहकारी संघवाद, जीएसटी परिषद और राजकोषीय अनुशासन के लिए स्पष्ट प्रतिबद्धता प्रदान की।

आम आदमी का जीवन मुद्रा लोन से बदला। उनको बिजली मिली। महिलाओं का सम्मान बढ़ा। इस कारण हमें इंफ्रास्ट्रक्चर और इकोनॉमी में निवेश करना पड़ेगा।
5 साल में 1 लाख करोड़ इकोनॉमी में जोड़े हैं। कई लोग सोचते हैं कि हम 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था कैसे बनेंगे। ये लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था वर्तमान वर्ष में ही 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगी। यह अब दुनिया में छठी सबसे बड़ी है। 5 साल पहले यह 11वें स्थान पर थी। 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था तक पहुंचने में हमें 55 साल से अधिक का समय लगा। लेकिन जब दिल आशा, विश्वास और आकांक्षा से भर जाता है, तो हमने केवल 5 वर्षों में 1 ट्रिलियन डॉलर जोड़ा।
उड़ान स्कीम छोटे शहरों को सुविधा दे रही है। इससे आम आदमी फ्लाइट में घूम रहा है। भारत के एयरक्राफ्ट फाइनेंसिंग और लीजिंग में उतरने का समय आ गया है। 300 किलोमीटर के नए मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। 656 किलोमीटर का मेट्रो नेटवर्क 1 साल में शुरू हुआ।
एक देश एक कार्ड से कई काम हो सकते हैं। कैबिनेट से मंजूरी के बाद फेम स्कीम को 10 हजार करोड़ रुपए जारी किए गए। लाइसेंस राज और कोटा राज के दिन लद गए। सरकार नेशनल हाइवे कार्यक्रम को रिस्ट्रक्चर करेगी। भारतमाला के दूसरे चरण में राज्य सरकारों को उनके हाइवे बनाने में मदद दी जाएगी।
मेक इन इंडिया के तहत एमएसएमई, स्टार्ट अप और रक्षा विनिर्माण पर जोर दिया गया। मेक इन इंडिया के तहत जल, जल प्रबंधन, स्वच्छ नदियां, ब्लू इकॉनोमी, अतंरिक्ष कार्यक्रम, गगनयान, चंद्रयान और सेटेलाइट कार्यक्रमों पर खासतौर पर ध्यान दिया गया।


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