नई दिल्ली। कल यानी 5 जुलाई को पेश होने वाले बजट में हो सकता है हर हिन्दुस्तानी पर कर को बोझ डाला जाए। देश में ज्यादातर लोगों को माता-पिता से पैतृक संपत्ति मिलती है। लेकिन ऐसा संभव है कि अब इस संपत्ति पर लेने वाले को टैक्स देना पड़े। जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्तियों, गहनों, शेयर, मियादी जमा राशि, बैंक में नकदी पर बजट में टैक्स लगाया जा सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि सरकार अपनी कमाई बढ़ाने के लिए इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकती है। इसके अलावा इस सरकार का मानना है कि इस कदम से कालाधन पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।

पैसे का सही तरीके से हो सके वितरण
हालांकि जानकारों की राय है कि इससे सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को और नुकसान होगा, लेकिन वित्त मंत्रालय इसे मजबूत कदम मान रहा है। सरकार का मानना है कि अमीर उत्तराधिकार के जरिए ज्यादा संपत्ति हासिल न कर सकें, क्योंकि इससे धन के वितरण में गड़बड़ी होती है। इसके अलावा अधिकारियों का मानना है कि यह इस टैक्स को लगाने का सही समय है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सरकार उत्तराधिकार में प्राप्त जायदाद और नकदी पर 35 साल बाद दोबारा 'संपत्ति कर' लागू करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है।
कई देशों में लागू है उत्तराधिकार कर
तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने 2005 में 10,000 रुपये से अधिक की बैंक से नकदी की निकासी पर 0.1 फीसदी का टैक्स लगाया था। इस सीमा को बाद में बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया था। लेकिन कई दिक्कतों के बाद इस टैक्स को 2009 में खत्म कर दिया गया था। दुनिया के कई देशों में उत्तराधिकारियों को अपने पूर्वजों या रिश्तेदारों से प्राप्त जायदाद या संपत्ति पर उत्तराधिकार टैक्स देना पड़ता है।
भारत में अभी इस पर नहीं लगता है कोई टैक्स
वर्तमान समय में आयकर अधिनियम 1961 में किसी वसीयत के तहत हस्तांतरण या उपहार कर के दायरे में प्राप्त विरासत के हस्तांरण के मामले को स्पष्ट रूप से अलग कर दिया गया है। ऐसे में भारतीय कानून में उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति पर टैक्स का प्रावधान नहीं है। उत्तराधिकार टैक्स को 1985 में खत्म कर दिया गया था।
बड़ी रकम या ज्यादा संपत्ति पर लग सकता है यह टैक्स
जानकारों के अनुसार अगर सरकार यह टैक्स लगाती है तो यह बड़ी नकदी या ज्यादा वैल्यू की सपत्ति पर ही लगाया जाएगा। ऐसे में आमलोगों पर इसका असर नहीं पड़ेगा।


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