इस बैंक ने सभी लोन किये सस्‍ते, जानें कितना होगा फायदा

आईसीआईसीआई बैंक ने सभी अवधियों के लोन की ब्याज दरों में 0.10% कटौती की है।

नई दिल्‍ली: आईसीआईसीआई बैंक ने सभी अवधियों के लोन की ब्याज दरों में 0.10% कटौती की है। जी हां आईसीआईसीआई बैंक से कर्ज लेना सस्ता हो गया है। हालांकि जानकारी के मुताबिक, बैंक ने सभी अवधियों के लिए कर्ज पर मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिग रेट (एमसीएलआर) में 0.1 फीसदी की कटौती की है। आपको बता दें कि नई दरें तुरंत प्रभाव से लागू हो गई हैं। इससे पहले बैंक ने अपनी डिपॉजिट रेट्स घटाई थीं। कटौती के बाद अब 1 साल अवधि वाले कर्ज के लिए एमसीएलआर घटकर 8.65 फीसदी हो गई है। इस तरह की कैटेगरी में ज्यादातर घर गिरवी रखकर लिए जाने वाले कर्ज और ऑटो लोन आते हैं।

एमसीएलआर क्‍या है?

एमसीएलआर क्‍या है?

बैंकों द्वारा एमसीएलआर बढ़ाए या घटाए जाने का असर नए लोन लेने वालों के अलावा उन ग्राहकों पर पड़ता है, जिन्होंने अप्रैल 2016 के बाद लोन लिया हो। दरअसल अप्रैल 2016 से पहले रिजर्व बैंक द्वारा लोन देने के लिए तय मिनिमम रेट बेस रेट कहलाती थी। यानी बैंक इससे कम दर पर कस्टमर्स को लोन नहीं दे सकते थे। 1 अप्रैल 2016 से बैंकिंग सिस्टम में एमसीएलआर लागू हो गई और यह लोन के लिए मिनिमम दर बन गई। यानी उसके बाद एमसीएलआर के आधार पर ही लोन दिया जाने लगा।

बैंकों को आरबीआई ने द‍िया निर्देश

बैंकों को आरबीआई ने द‍िया निर्देश

इस बात से भी अवगत करा दें कि आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक जैसे टॉप प्राइवेट सेक्टर लेंडर्स ने मध्य जून में कुछ चुनिंदा डिपॉजिट्स पर ब्याज दरों में 0.10 से 0.25 फीसदी तक की कटौती की है।

जानकारी दें कि आरबीआई ने 6 जून को मॉनिटरी पॉलिसी रिव्यू मीटिंग में रेपो रेट में एक बार फिर 0.25 फीसदी की कटौती की थी। बता दें क‍ि आरबीआई ने कहा था कि प्रमुख ब्याज दरों में हो चुकी 0.50 फीसदी कटौती के एवज में बैंकों ने अपनी कर्ज दरों में 0.21 फीसदी की ही कटौती की है। इसे देखते हुए आरबीआई ने बैंकों को कर्ज दरें और कम करने को कहा था। वहीं 2019 में आरबीआई अब तक प्रमुख ब्याज दरों में 0.75 फीसदी की कटौती कर चुका है।

आरटीजीएस, एनईएफटी के जरिए फंड ट्रांसफर हुआ सस्ता

आरटीजीएस, एनईएफटी के जरिए फंड ट्रांसफर हुआ सस्ता

जानकारी दें कि आज से आरटीजीएस और एनईएफटी के जरिए फंड ट्रांसफर अब सस्ता हो गया है। इसकी वजह आरबीआई द्वारा ऐसे ट्रांजेक्शंस पर कोई चार्ज नहीं लगाने का फैसला है, जो 1 जुलाई से अमल में आएगा। आरबीआई ने बैंकों को इस फैसले का फायदा ग्राहकों को देने को कहा है। रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) सिस्टम बड़े अमांउट एक खाते से दूसरे खाते में तत्काल ट्रांसफर करने की सुविधा है। वहीं नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर (एनईएफटी) सिस्टम 2 लाख रुपये तक की राशि ट्रांसफर करने में इस्तेमाल होता है। बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने 6 जून को द्वैमासिक मौद्रिक समीक्षा के बाद घोषणा में कहा था कि उसने एनईएफटी और आरटीजीएस के जरिए सदस्य बैंकों पर लगाए जाने वाले विभिन्न शुल्कों की समीक्षा की है।

आपको इस बात से भी अवगत करा दें कि इंडियन बैंक एसोसिएशन के चेयरमैन सुनील मेहता ने एसोसिएशन के एक न्यूजलेटर में कहा कि डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के इरादे से आरबीआई ने आरटीजीएस और एनईएफटी ट्रांजेक्शन पर चार्ज नहीं लगाने का फैसला किया है। इससे बैंकों को इन ट्रांजेक्शन के लिए कस्टमर्स से फीस घटाने में मदद मिलेगी।

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