नई दिल्ली। अगर आपको लगता है पैसा आपने सरकरी योजनाओं में जमा किया है तो यह सुरक्षित है, तो फिर से विचार करने की जरूरत है। दरअसल आईएलएंडएफएस एक सरकारी कंपनी है, जिसे रेटिंग कंपनियों ने बहुत अच्छी रेटिंग दी हुई थी। इसी के चलते लोगों की गाढ़ी कमाई की रखवाली करने वाले प्रॉविडेंट फंड (पीएफ) ने अपना पैसा इसमें लगा दिया। अब स्थिति यह बन रही है कि पीएफ का काफी पैसा इसमें फंस गया है, जिसके चलते पीएफ को अपनी ब्याज दरें घटानी पड़ सकती हैं। वित्त मंत्रालय ने आईएलएंडएफएस में फंसे हुए निवेश के चलते पीएफ ट्रस्टी बोर्ड से कहा है कि वह अपनी घोषित ब्याज दरों पर फिर से विचार करें।

अभी कितना मिल रहा है पीएफ पर ब्याज
अभी पीएफ पर 8.65 फीसदी ब्याज देने की घोषणा की गई है। लेकिन अब इस पर संशय के बादल हैं। वित्त मंत्रालय ने इम्प्लॉई प्रॉविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (ईपीएफओ) को पीएफ की ब्याज दर को 8.65 फीसदी से घटाने को कहा है। ईपीएफओ 8.5 करोड़ कामगारों के पीएफ का पैसे की देखरेख करता है।
आईएलएंडएफएस कैसे बनी और क्या करती है?
आईएलएंडएफएस एक सरकारी क्षेत्र की कंपनी है। बाद में इस कंपनी ने अपनी कई सहायक कंपनियां तैयार कीं। आईएलएंडएफएस को नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (एनबीएफसी) का दर्जा मिला हुआ है। 1987 में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया और हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को कर्ज देने के मकसद से एक कंपनी बनाई जिसका नाम आईएलएंडएफएस रखा गया। आज यह कंपनी वित्तीय दिक्कतों का सामना कर रही है और बैंकों और म्यूचुअल फंड सहित पीएफ जैसे संस्थानों का करीब 90,000 करोड़ रुपये इसमें फंसा हुआ है।
बनी हुई है मुश्किल की स्थिति
श्रम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले ईपीएफओ ने चुनाव से पहले समाप्त वित्त वर्ष के लिए 8.65 प्रतिशत ब्याज दर की घोषणा की थी। उस वक्त भी पीएफ की वित्तीय स्थिति को देखते हुए यह सही नहीं माना जा रहा था।
वित्त मंत्रालय ने दी सलाह
पीएफ की तरफ से ब्याज दरों की घाेषणा के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने श्रम मंत्रालय को दिए गए मेमोरेंडम में लिखा है कि आईएलएंडएफएस में निवेश के चलते फंड को नुकसान हुआ होगा। ऐसे में श्रम व रोजगार मंत्रालय को वित्त वर्ष 2018-19 के लिए घोषित ब्याज दर पर फिर से विचार करने की सलाह दी जाती है।
आईएलएंडएफएस के चलते बढ़ रही दिक्कत
देश के करीब 20 फीसदी कामगार ईपीएफओ के मेम्बर हैं। यह हर महीने अपने वेतन का एक हिस्सा पीएफ में जमा कराते हैं। ईपीएफओ अपने फंड का 85 फीसदी से भी ज्यादा हिस्सा केंद्र और राज्यों की सिक्योरिटीज और ऊंची रेटिंग वाले कॉरपोरेट बांड में निवेश कर रखा है। ईपीएफओ इस वक्त करीब 190 अरब डॉलर की आसेट संभाल रहा है। ईपीएफओ के करीब 8.31 करोड़ डॉलर (5.75 अरब रुपये) दिक्कतों से जूझ रही आईएलएंडएफएस के बॉन्ड्स में लगे हुए हैं।


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