मोदी सरकार टेलिकॉम स्पेक्ट्रम के लिए अब तक की सबसे बड़ी नीलामी करने की योजना बना रही है।
नई दिल्ली: मोदी सरकार टेलिकॉम स्पेक्ट्रम के लिए अब तक की सबसे बड़ी नीलामी करने की योजना बना रही है। अनुमान है कि 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी की वैल्यू 6 लाख करोड़ रुपये होगी। इसके लिए सरकार ने इस साल के अंदर ही अब तक का सबसे बड़ा मेगा स्पेक्ट्रम नीलामी करने का निर्णय किया है। इसके अंतर्गत सरकार अपने पास कोई भी स्पेक्ट्रम रिजर्व आरक्षित रखने की जगह समस्त मौजूदा स्पेक्ट्रम को निजी कंपिनयों को नीलाम करेगी।

स्पेक्ट्रम नीलामी पर ट्राई से किया गया अनुरोध
बता दें कि दूरसंचार आयोग, डिजीटल कम्युनिकेशन कमीशन, ने गुरूवार को हुई अपनी बैठक में इस तरह के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। नीलामी के लिए आयोग ने ट्राई, दूरसंचार नियामक प्राधिकरण, से एक बार फिर से संस्तुति आमंत्रित करने का निश्चय किया। ट्राई को अनुरोध किया गया है कि वह स्पेक्ट्रम नीलामी पर फिर से अपनी सलाह मशविरा दे।
करीब 8600 मेगाहर्टज स्पेक्ट्रम को नीलामी के लिए उपलब्ध
वहीं एक अधिकारी ने कहा कि सरकार मौजूदा समय तक केवल अपना 40 प्रतिशत स्पेक्ट्रम बेचती थी। लेकिन इस बार सरकार अपने पास मौजूद समस्त स्पेक्ट्रम की नीलामी करेगी। इसमें बहुप्रतीक्षित 5जी स्पेक्ट्रम भी शामिल होगा। हालांकि दूरसंचार मंत्रालय अलग बैंड में करीब 8600 मेगाहर्टज स्पेक्ट्रम को नीलामी के लिए उपलब्ध कराएगा। इस अधिकारी ने कहा कि स्पेक्ट्रम के आरक्षित मूल्य से सरकार को करीब 5.83 लाख करोड़ रूपये मिलने की उम्मीद है।
सभी को ब्रॉडबैंड देने का लक्ष्य
जानकारी दें कि यह राशि और भी उपर जा सकती है क्योंकि नीलामी में कंपनियां जब बोली लगाएंगी तो राशि उपर जाएंगे। इस अधिकारी ने कहा कि यह सही है कि कंपनियां आरक्षित मूल्य कम करने की मांग कर रही है। इसको ध्यान में रखते हुए हमनें ट्राई को कहा है कि वह नीलामी की प्रक्रिया, स्पेक्ट्रम नीलामी से हासिल होने वाली राशि की वसूली का नियम बताने के साथ ही आरक्षित मूल्य पर भी अपनी सलाह फिर से दे। यह बदलाव इसलिए भी जरूरी है क्योंकि प्रधानमंत्री ने सभी को ब्रॉडबैंड देने का लक्ष्य दिया है और डिजीटल इंडिया को भी गति देने का निर्णय किया गया है। ऐसे में नीतियों को इस तरह बनाने की जरूरत है जिससे ये लक्ष्य भी हासिल किये जा सके।


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