हाल ही में उत्तरप्रदेश ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए कंपनियों को एक्सप्रेशन ऑफ इंटेरेस्ट के लिए आमंत्रित किया है।
नई दिल्ली: हाल ही में उत्तरप्रदेश ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए कंपनियों को एक्सप्रेशन ऑफ इंटेरेस्ट के लिए आमंत्रित किया है। जी हां बता दें कि और यह काम करने वाला उत्तरप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चार्जिंग स्टेशन की दिशा में बड़ी कामयाबी मिली है। जानकारी दें कि सरकार ने दिसंबर में चार्जिंग स्टेशन से जुड़े दिशा निर्देश जारी किए थे।
शहर में हर तीन किलोमीटर पर चार्जिंग स्टेशन
बता दें कि इसमें राजमार्गों पर हर 25 किलोमीटर और शहर में हर तीन किलोमीटर पर चार्जिंग स्टेशन बनाने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा सब्सिडी दी गई। इस बात से भी अवगत करा दें कि एनटीपीसी और पावर ग्रिड सरीखी कंपनियों के साथ मिलकर ये चार्जिंग स्टेशन लगाने की तैयारी है। इतना ही नहीं जो भी ये चार्जिंग स्टेशन लगाएगा उसे तीन साल तक मरम्मत का भी जिम्मा उसे ही निभाना पड़ेगा।
स्टेशन के लिए 8 राज्यों की पहचान की गई
इस बात से भी अवगत करा दें कि दिल्ली अभी तक एकमात्र शहर है जहां इस तरह के चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हैं। वहीं केंद्र के दिशा निर्देशों को उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने के साथ सुरक्षित, विश्वसनीय, सुलभ और किफायती चार्जिंग बुनियादी ढांचे को सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया है। जबकि एक्सप्रेशन ऑफ इंटेरेस्ट की ओर से 6 जून को जारी किए गए डॉक्यूमेंट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के 8 राज्यों की पहचान की गई है। जिसमें लखनऊ, कानपुर, अगरा, नोएडा, प्रयगराज, गाज़ियाबाद, और मेरठ शामिल हैं। इसके साथ ही इन चार्जिंग स्टेशनों को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, दिल्ली-आगरा एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, साथ ही लखनऊ से बलिया एक्सप्रेसवे जिसका अभी निर्माण चल रहा है पर भी लगाने के लिए कहा गया है।
मारुति, महिंद्रा, टाटा और हुंदै जैस कंपनियों का इलेक्ट्रिक वाहन पर फोकस
बता दें कि राज्य से गुजरने वाले तीन प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग -एनएच -1, 24 और 27- भी इसके लिए निर्धारित किए गए हैं। दूसरी तरफ अगर जानकारों की मानें तो उनके मुताबिक, 2030 तक इलेक्ट्रिक गाड़ियों का बाजार करीब 50 हजार करोड़ रुपए का हो जाएगा। बिजली कंपनियों के साथ रेलवे अपनी पार्किंग पर चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए जमीन देने की रणनीति बना रहा है। तेल कंपनियों ने तो अपने पंपों पर चार्जिंग स्टेशन लगाने शुरू भी कर दिए हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी और दूसरी जरूरी चीजों के लेकर सरकारी और निजी क्षेत्र की कंपनियों अपनी रणनीति में तेजी से बदलाव कर रही हैं। मारुति, महिंद्रा, टाटा और हुंदै जैस कंपनियों का इलेक्ट्रिक वाहन की दिशा में खास फोकस कर रही हैं।


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