दूसरे कार्यकाल (Second term) में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) एक और बड़ा फैसला लेने जा रहे हैं।
नई दिल्ली: दूसरे कार्यकाल (Second term) में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) एक और बड़ा फैसला लेने जा रहे हैं। जी हां और इस बार ये बड़ा फैसला गरीबों (poor) के पेट भरने का हैं। बता दें कि सरकार (Government) 16.3 करोड़ अतिरिक्त परिवारों को हर महीने 1 किलो चीनी सस्ती दरों पर देने की योजना (Scheme) पर विचार कर रही है। जानकारी दें कि केंद्र सरकार (central government) खाद्य पदार्थों (Food items) के बफर स्टॉक को खत्म करने के लिए जल्दी ही सब्सिडी (Subsidy) पर दिए जाने वाले पदार्थों की मात्रा में बढ़ोतरी कर सकती है। साथ ही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National Food Security Act) के लाभार्थियों के लिए मासिक राशन (Monthly ration) में चीनी भी जोड़ी जा सकती है। सरकार (Government) के इस फैसले से लगभग 16.3 करोड़ परिवार को फायदा हो सकता है।
81 करोड़ लोगों को ज्यादा गेहूं और चावल मिल सकता
इस बात से अवगत करा दें कि पीटीआई के अनुसार, केंद्रीय कैबिनेट (Central cabinet) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National Food Security Act) के तहत लाभार्थियों को दिए जाने वाले मासिक कोटा (Monthly quota) में 2 किलो प्रति लाभार्थी की बढ़ोतरी कर सकती है। यदि ऐसे होता है तो प्रत्येक लाभार्थी को 5 किलो के बजाए 7 किलो राशन (Ration) मिलेगा। इससे करीब 81 करोड़ लोगों को ज्यादा गेहूं और चावल (Wheat and rice) मिल सकेगा। साथ ही सरकार करीब 19 करोड़ परिवारों को अस्थायी रूप से सब्सिडी (Temporary Subsidy) वाली चीनी देने का भी फैसला ले सकती है। अभी केवल 2.4 करोड़ अंत्योदय परिवारों को सब्सिडी (Subsidy)वाली चीनी (Suger) दी जाती है।
2 रुपए प्रति किलो की दर पर गेहूं
वहीं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National Food Security Act) के तहत अभी गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को हर महीने सब्सिडीयुक्त (Subsidized) 5 किलो अनाज दिया जाता है। इसके तहत 1 रुपए प्रति किलो की दर पर मोटा अनाज, 2 रुपए प्रति किलो की दर पर गेहूं और 3 रुपए प्रति किलो की दर चावल (rice) दिया जाता है। गरीबों से भी गरीब की श्रेणी में आने वाले अंत्योदय अन्न योजना के लाभार्थियों को हर महीने 35 किलो अनाज दिया जाता है। राजनीतिक (Politically) तौर पर इसे चुनाव बाद का गिफ्ट माना जा रहा है लेकिन असल में यह फैसला अनाजों (Grains) को रखने की लागत को कम करने के उद्देश्य से लिया जा रहा है।
26 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करता है एफसीआई
फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (Food Corporation of India) (एफसीआई) हर साल एक लाख टन गेहूं के रखरखाव (Wheat Maintenance) पर 29 करोड़ रुपए और इतने ही चावल के रखरखाव पर 41 करोड़ रुपए खर्च करता है। इस प्रकार एफसीआई कुल अनाज (FCI total grains) के रखरखाव पर हर साल 26 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करता है। यदि सरकार 6 महीने तक सब्सिडी वाले अनाजों (Subsidized grains) का वितरण करती है तो उस पर करीब 50 हजार करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा, लेकिन इससे एफसीआई (FCI) की रखरखाव की लागत कम हो जाएगी। इसके अलावा सब्सिडी (Subsidy) पर 13.50 रुपए प्रति किलो की दर से चीनी बेचने पर सरकार (Government) पर सालाना आधार पर 4700 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। एफसीआई के आंकड़ों के अनुसार, एक जुलाई तक उसके पास गेहूं (Wheat) और चावल (Rice) का 41 मिलियन टन बफर स्टॉक उपलब्ध (Buffer stock available) था, जो इस सम 75 मिलियन टन पर पहुंच गया है। अगले महीने इसके 80 मिलियिन टन पर पहुंचने की उम्मीद है।
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