नई दिल्ली। आईटीसी (ITC) के चेयरमैन और सीईओ रहे पद्म भूषण से सम्मानित वाई सी देवेश्वर (YC Deveshwar) आज (11 मई 2019) निधन हो गया। उन्होंने अंजान सी एक कंपनी इतना बड़ा बना दिया कि लोग इस कंपनी यानी आईटीसी (ITC) को नॉन फुल स्टॉप कंपनी मानने लगे। वाई सी देवेश्वर ने कंपनी का पूरा नक्शा ही बदल कर रख दिया। कभी यह सिगरेट बनाने वाली मानी जाती है, लेकिन आज घरों में इस्तेमाल होने वाले आटा से लेकर बिस्कुट तक न जाने क्या-क्या उत्पाद बना रही है। वाई सी देवेश्वर (YC Deveshwar) का जन्म पाकिस्तान के शहर लाहौर में हुआ था, लेकिन उनके लिए भारत ही सब कुछ रहा। आईआईटी से शिक्षा लेने वाले वाई सी देवेश्वर (YC Deveshwar) एक बार आईटीसी से जुड़े तो फिर मृत्यु तक उसी के बने रहे। आज जब वाई सी देवेश्वर (YC Deveshwar) नहीं रहे हैं, लेकिन उनकी मेहनत आईटीसी (ITC) की सफलता के रूप में हर भारतीय को प्रभावित कर रही है। चाहे वह फूड, पर्सनल केयर, ब्रांडेड अपैरल, सिगरेट, होटल, एग्री-बिजनेस और आईटी जैसा कोई भी क्षेत्र रहा हो, इसको महसूस किया जा सकता है। आइये जानते उनके जीवन की उपलब्धियां।

उनका जन्म स्थल और शिक्षा
वाई सी देवेश्वर (YC Deveshwar) का पूरा नाम योगेश चंद्र देवेश्वर था। उनका जन्म 4 फरवरी 1947 को पाकिस्तान के शहर लाहौर में हुआ था। उन्होंने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT), दिल्ली, से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी. टेक (B Tec) की डिग्री 1968 में ली थी। इसके बाद उन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल, मैसाचुसेट्स, से एएमपी डिप्लोमा किसा और अंत में अमेरिका के कॉर्नेल विश्वविद्यालय से होटेलिएरिंग और सेवाओं में एडवांस प्रशिक्षण का एक कोर्स किया।
आईटीसी (itc) से कब जुड़े
वाई सी देवेश्वर (YC Deveshwar) को 1996 में आईटीसी (ITC) के सीईओ और चेयरमैन पद पर नियुक्त किया था। इस पद पर वह कंपनी में ट्रेनी के पद से भर्ती होकर आए थे। वाई सी देवेश्वर 1968 में आईटीसी (ITC) से जुड़े थे। 1984 में आईटीसी (ITC) के निदेशक बने, जुलाई 2011 की एजीएम में उन्हें 5 साल के लिए चेयरमैन बनाने की घोषणा की गई थी। उन्होंने 2017 में पद छोड़ दिया था।
कठिन समय में संभाली आईटीसी (ITC) की बागडोर
वाई सी देवेश्वर (YC Deveshwar) ने सबसे कठिन समय में आईटीसी (ITC) की बागडोर संभाली थी। सिगरेट कंपनी मानी जाने वाली यह कंपनी तय नहीं कर पा रही थी कि आगे उसे क्या करना चाहिए। कंपनी कई प्रयोग कर चुकी थी और सभी में असफल रही थी। इस दौरान कंपनी वित्तीय रूप से भी परेशानी का सामना करने लगी थी। इस कठिन दौर में इस विदेशी कंपनी ने बागडोर एक भारतीय वाई सी देवेश्वर (YC Deveshwar) को सौंपने का फैसला किया। इन्होंने कंपनी को निराश नहीं किया। इन्होंने इस विदेशी कंपनी का भारतीयकरण शुरू किया। सिगरेट पर फोकस खत्म कर इन्होंने हर भारतीय के घर में इस्तेमाल होने वाले आटा से लेकर बिस्कुट तक बनाया। इस उत्पादों को बनाने के लिए उन्होंने एक अभिनव प्रयोग किया। यहा प्रयोग था ई-चौपाल। उन्होंने भारत की आत्मा माने जाने वाले किसानों से सीधे कच्च माल यानी उनकी फसल खरीदने का प्रयोग किया। आज यह सफल प्रयोग विदेशों में पढ़ाई के टेस्ट केस है, लेकिन आज से कई साल पहले यह सोचना और उसे अमलीजामा पहनाना उन्हीं के बस की बात थी। ऐसे ही न जाने कितने काम करके उन्होंने इस कंपनी का चेहरा एक भारतीय कंपनी का बना दिया। अब सब इतिहास है और बाकी है तो कई ऐसे ब्रांड जिनमें भारत की खुशबू महकती है, जो भारतीयों को हरदम उनकी याद दिलाते रहेंगे।
इन कामों ने बदला आईटीसी (ITC) का चेहरा
-2000 में आईटीसी इंफोटेक इंडिया के साथ आईटी इंडस्ट्री में रखा कदम
-2002 में 'पेपरक्राफ्ट' ब्रांड के तहत नोटबुक्स की प्रीमियम रेंज उतारी
-मेंस वियर ब्रांड 'जॉन प्लेयर्स' की हुई शुरुआत
-मिंट-ओ, कैंडीमैन और आशीर्वाद आटा उतारा
-2003 में स्टूडेंट्स के लिए 'क्लासमेट' नाम से नोटबुक रेंज उतारी
-बिस्किट सेगमेंट में उतरते हुए 'सनफीस्ट' ब्रांड किया पेश
-2005 में फिएमा-डि-विलिस, विवेल जैसे ब्रांड के साथ पर्सनल केयर क्षेत्र में कदम रखा
-2007 में 'बिंगो' के साथ ब्रांडेड स्नैक्स में किया प्रवेश
-2010 में इंस्टैंट नूडल्स ब्रांड 'येप्पी' लॉन्च किया
-2013 में इंगेज के साथ डियोड्रेंट सेगमेंट में भी की एंट्री


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