नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (National Company Law Tribunal) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (Reliance Communications) (आरकॉम) की दिवाला प्रक्रिया शुरू कर दी है।
नई दिल्ली: नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (National Company Law Tribunal) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (Reliance Communications) (आरकॉम) की दिवाला प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही एनसीएलटी (NCLT) ने मुकदमेबाजी के 357 दिनों को कंपनी की इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया (Insolvency procedure) की अवधि से बाहर रखने को भी मंजूरी दे दी है। बता दें कि RCom अनिल अंबानी समूह (Anil Ambani Group) की पहली कंपनी है जिसे बैंकरप्ट घोषित किया गया है। कंपनी पर बैंकों का 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज (Loan) बकाया है।
जानकारी दें कि एनसीएलटी (NCLT) ने गुरुवार को कंपनी के बोर्ड को भंग कर दिया तथा उसके संचालन के लिए नए रिजोल्यूशन प्रोफेशनल्स (Resolution Professionals) की नियुक्ति की। इसके साथ ही भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की अगुवाई वाले 31 बैंकों के कंसोर्टियम को क्रेडिटर्स (Consortium Creditors) की समिति (COC) बनाने की अनुमति दे दी।
357 दिन की अवधि की बैंकरप्सी प्रक्रिया में छूट मांगी
बता दें कि सुनवाई के दौरान आरकॉम (Rcom) ने मौजूदा रिजोल्यूशन प्रोफेशनल्स (Resolution Professionals) के जरिए 30 मई, 2018 से 30 अप्रैल, 2019 की अवधि यानी 357 दिन की अवधि की बैंकरप्सी प्रक्रिया में छूट मांगी। वहीं कंपनी (company) ने कहा कि इस दौरान अपीलेट ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) से उसे प्रक्रिया पर स्टे मिला हुआ था। हालांकि वीपी सिंह और आर दुरईसामी की बेंच ने कहा कि इस मामले को कानून और दिशानिर्देशों के अनुरूप आगे बढ़ाया जाना चाहिए। ट्रिब्यूनल ने रिलायंस इन्फ्राटेल (Reliance Infratel) और रिलायंस टेलीकॉम (Reliance Telecom) तथा आरकॉम (Rcom) को उपरोक्त अवधि की छूट दे दी है।
RCom को करीब 2 साल पहले बंद करना पड़ा आपरेशन
अनिल अंबानी (Anil airport) की संकट में फंसी आरकॉम (Rcom) को करीब दो साल पहले अपना आपरेशन बंद (Operation closed) करना पड़ा था। कंपनी ने रिलायंस जियो (Reliance jio) को स्पेक्ट्रम बेचकर बैंकरप्सी प्रक्रिया से बचने का प्रयास किया लेकिन लंबी कानूनी प्रक्रिया और सरकार की ओर से मंजूरियों में देरी से इसमें अड़चनें आईं। वहीं इसके अलावा कंपनी सार्वजनिक रूप से रीयल एस्टेट (Real estate) और स्पेक्ट्रम संपत्तियों (Spectrum properties) के मोनेटाइजेशन के जरिए बैंकों (Bank) का पैसा लौटाने के सार्वजनिक तौर पर किए गए वादे को भी पूरा नहीं कर पाई।
पिछले महीने मुकेश अंबानी ने 480 करोड़ रुपये की मदद
इस बात से अवगत करा दें कि पिछले ही महीने कंपनी के चेयरमैन (Company chairman) अनिल अंबानी (Anil Ambani) सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की अवमानना के मामले में संभावित रूप से जेल जाने से बचे हैं। उनके बड़े भाई मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ने अंतिम क्षण में उन्हें 480 करोड़ रुपये की मदद देकर जेल जाने से बचा लिया। सुप्रीम कोर्ट ने आरकॉम (Rcom) को यह राशि एरिक्सन (Ericsson) को चुकाने का निर्देश दिया था। एरिक्सन ने पिछले साल आरकॉम (Rcom) को एनसीएलटी (NCLT) में घसीटा था। वह उसकी आपरेशनल क्रेडिटर (Operational Creditors) है।
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