नई जीडीपी श्रृंखला (New GDP series) मोदी सरकार (Modi Government) की विकास दर (Growth rate) यूपीए (UPA) से अधिक है।
नई दिल्ली: नई जीडीपी श्रृंखला (New GDP series) मोदी सरकार (Modi Government) की विकास दर (Growth rate) यूपीए (UPA) से अधिक है। जी हां राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (National Sample Survey Office) (NSSO) ने नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi government) के तहत भारत की जीडीपी श्रृंखला (GDP series) की गणना करने के लिए इस्तेमाल किए गए कॉरपोरेट (Corporate) मामलों के मंत्रालय में खामियों (Flaws) का पता लगाया है, जो ताजा आंकड़ों के तहत विवादास्पद आंकड़े (Controversial figures) लाते हैं।

बता दें कि 2015 में, मोदी सरकार (Modi Government) ने 2004-2005 से 2011-12 तक जीडीपी गणना (GDP calculations) के लिए आधार वर्ष को संशोधित (Revised) किया था। जिससे पूर्ववर्ती यूपीए प्रशासन (Preceding UPA Administration)के विकास के अनुमान में महत्वपूर्ण गिरावट आई थी। जबकि पुरानी श्रृंखला (Chain) 2010-11 के लिए वृद्धि का अनुमान लगाती थी। भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian economy) द्वारा प्राप्त उच्चतम 10.26 प्रतिशत, संशोधित आधार वर्ष (Revised basis year) ने इसे घटाकर 8.5 प्रतिशत कर दिया। बता दें कि जीडीपी श्रृंखला (GDP series) केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (Central statistical office), सरकारी एजेंसी (government agency) द्वारा तैयार की जाती है जो सभी सांख्यिकीय गतिविधियों (Statistical activities) का समन्वय (Co-ordination) करती है।
भारतीय जीडीपी श्रृंखला (Indian GDP series) निजी कॉरपोरेट क्षेत्र (corporate sector) के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) (आरबीआई) द्वारा किए गए कंपनियों के सर्वेक्षण (Survey) पर निर्भर करती है। नए ने कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा बनाए गए 'MCA-21' डेटाबेस को नियोजित किया है जिसमें एक सूची शामिल है पंजीकृत कंपनियां (Registered companies) है। हालांकि पर्याप्त डेटा के बिना अप्रयुक्त डेटाबेस (Unused database) के उपयोग के बारे में शुरुआत से ही सवाल उठाए गए हैं, जिससे इस डेटा (Data) की विश्वसनीयता (Reliability) पर चिंता बढ़ रही है।
हालांकि बता दें कि यह तर्क (Argument) बुधवार को घटता हुआ लग रहा था। वहीं मिंट ने दावा किया था कि एनएसएसओ (NSSO) ने सेवा क्षेत्र के उद्यमों (Enterprises) की हालिया रिपोर्ट (Recent report) में देखा था कि एमसीए -21 (MCA-21) के नमूने में चुनी गई एक तिहाई से अधिक फर्मों को गैर-पता लगाने योग्य या गलत तरीके से वर्गीकृत (Classified) किया गया था।


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