नई दिल्ली। गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों यानी फंसे हुए कर्जो (NPA) को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत भारतीय स्टेट बैंक (SBI) दिवाला और दिवालियापन (IBC) के तहत 100 करोड़ रुपये से अधिक के मामलों को संभालने के लिए तनावग्रस्त परिसंपत्तियों की अपनी टीम को मजबूत करने के लिए और अधिक दिवालिया और कानूनी फर्मो को नियुक्त करेगी।

ये है एसबीआई (SBI) की तैयारी
एसबीआई (SBI) ने कहा है कि बैंक 100 करोड़ रुपये से अधिक के मामलों को संभालने के लिए अपनी टीम में वकीलों और कानूनी फर्मों को जोड़ने की तैयारी कर रहा है। एसबीआई (SBI) फिलहाल आवेदनों की जांच कर रहा है। बैंक की देश भर में 20 तनावग्रस्त परिसंपत्तियां प्रबंधन शाखाएं हैं, जो कि केंद्रीय तनावग्रस्त परिसंपत्तियां समाधान वर्टिकल को रिपोर्ट करती हैं।
सुप्रीम कोर्ट (SC) के फैसले से पड़ा असर
बैंकिंग सूत्रों ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय (SC) ने अप्रैल में दिए गए आदेश में कहा था कि 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के एनपीए (NPA) के मामलों में बैंकों (Bank) को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) जाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का निर्देश लेने की जरूरत नहीं है। इसके बाद से सभी बैंक (bank) लंबे समय से लंबित सभी मामलों को समयबद्ध तरीके से हल करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि आईबीसी (IBC) के तहत मामला सुलझाने में वक्त लगता है, लेकिन बैंकों के पास अन्य विकल्पों की तुलना में यह बेहतर विकल्प है।
देश के बैंकों का तेजी से बढ़ा है एनपीए (NPA)
देश के बैंकिंग सिस्टम में एनपीए (NPA) तेजी से बढ़ा है। लेकिन जब से मामले नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में भेजे जाने लगे हैं, इसमें गिरावट दर्ज की जा रही है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में एनपीए (NPA) वाली कंपनी का मालिकाना हक छिन जाता है और ज्यादातर कारोबारी ऐसा नहीं चाहते हैं। यही कारण है कि बैंक की एनपीए (NPA) वसूली भी बढ़ रही है।
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