तेल (oil) की कीमतों में एक पलटाव (Rebound) से भारत की सौम्य मुद्रास्फीति (Benign inflation) की उम्मीदों को खतरा है।
नई दिल्ली : तेल (oil) की कीमतों में एक पलटाव (Rebound) से भारत की सौम्य मुद्रास्फीति (Benign inflation) की उम्मीदों को खतरा है। जिसने पिछले सप्ताह केंद्रीय बैंक (central bank) को 2019 की दूसरी दर में कटौती करने की अनुमति दी थी।

जानकारी दें कि पिछले पांच महीने के उच्च स्तर (high level) पर क्रूड (Crude) के साथ, कई निवेशक भारतीय रिज़र्व बैंक (reserve bank of india) की मौद्रिक सहजता की गति के बारे में कम आश्वस्त (Convinced) हो रहे हैं। हालांकि आर्थिक विकास (Economic Development) में मंदी और अल्प मुद्रास्फीति अभी भी सहजता का समर्थन करती है।
25 आधार अंकों की दर से कटौती करने का स्थान
लो हेडलाइन प्रिंट (low headline print) ने गवर्नर शक्तिकांत दास (governor saktikant das) और रेट-सेटिंग पैनल (Rate-setting panel) को अर्थव्यवस्था (Economy) को समर्थन देने के लिए फरवरी और अप्रैल में 25 आधार अंकों की दर से कटौती करने का स्थान दिया। वहीं कुछ अर्थशास्त्री भोजन और ईंधन (Fuel) की लागत में एक और कमी के लिए जगह देखते हैं। जानकारी दें कि शुक्रवार को होने वाले आंकड़ों से संभवत: फरवरी में हेडलाइन मुद्रास्फीति (Inflation) पिछले महीने के 2.5 प्रतिशत से बढ़कर 2.8 प्रतिशत हो जाएगी।
तेल की कीमतों में वृद्धि रहने से आर्थिक विकास और मुद्रास्फीति असर
मुंबई में क्रिसिल लिमिटेड के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ( Dharmakirti Joshi) ने कहा हैं कि कच्चे तेल (crude prices) की कीमतों में हालिया वृद्धि, अगर निरंतर रही, तो आर्थिक विकास ( economic growth) और मुद्रास्फीति (Inflation) दोनों दृष्टिकोणों के लिए चुनौती बन सकती है।
इस बात से अवगत करा दें कि ब्रेंट के लिए पूर्वानुमान, दुनिया के आधे तेल के बेंचमार्क (benchmark) को उत्पादन में कटौती के पीछे हटा दिया गया है। वहीं आरबीआई (RBI) देखता है कि कीमतों को और आगे बढ़ाया जाना चाहिए, इतना ही नहीं यू.एस.-चीन व्यापार (U.S.-China trade ) तनाव को तेजी से हल किया जाना चाहिए। दोनों पक्षों के बीच एक व्यापार समझौते के करीब हैं। बता दें कि अगले महीने के भीतर एक को जारी रखने के उद्देश्य से बातचीत जारी है।
हाल ही में किये गये केंद्रीय बैंक (central bank) द्वारा अध्ययन के मुताबित 10 डॉलर (dollar) की बढ़ोतरी 65 डॉलर प्रति बैरल से हुई है। जिससे हेडलाइन मुद्रास्फीति में 49 आधार अंक की वृद्धि होगी, जबकि 55 डॉलर प्रति बैरल से इसी तरह की वृद्धि से 58 प्रतिशत तक बढ़त होगी, जिससे शीर्षक मुद्रास्फीति (inflation) में वृद्धि होगी।
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