IMF: बैंकों के पूंजीकरण के स्तर को मजबूत करने की जरुरत

भारत के सरकारी बैंकों (Government banks) में पूंजीकरण (Capitalization) को मजबूत करन की जरुरत है।

नई द‍िल्‍ली: भारत के सरकारी बैंकों (Government banks) में पूंजीकरण (Capitalization) को मजबूत करन की जरुरत है। जी हां भारत में गैर - निष्पादित कर्ज (Non-executed loan) (एनपीएल) यानी फंसे ऋण के ऊंचे स्तर को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) (IMF) ने कहा कि भारत को कुछ बैंक (bank) खासकर सरकारी बैंकों में पूंजीकरण के स्तर को मजबूत करने की जरूरत है।

Need To Strengthen The Level Of Capitalization In Govt Banks Says IMF

पूंजीकरण के स्तर को मजबूत करना

बता दें कि आईएमएफ (IMF) की मौद्रिक एंव पूंजी बाजार (Monetary and capital market) विभाग की प्रमुख एना इलियाना ने बुधवार को कहा बैंकों में पूंजीकरण के स्तर को मजबूत करना भारत के लिए वित्तीय क्षेत्र आकलन कार्यक्रम (एफएसएपी) की सिफारिशों में एक है। हालांकि मुद्राकोष की अधिकारी ने का कहना हैं क‍ि भारत में गैर - निष्पादित ऋण (non-performing loans) का स्तर अभी भी काफी अधिक है। इसे देखते हुए कुछ बैंकों खासकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पूंजीकरण के स्तर को मजबूत करना चाहिए।

इस बात का भी ज्र‍िक किया गया कि भारत ने बैंकों में पूंजी बफर को बढ़ाने और सरकारी बैंकों (government bank) में कामकाज को बेहतर बनाने के लिए भी कुछ कदम उठाए थे। इनका कुछ सकारात्मक असर (positive impact) हुआ है। गैर - निष्पादित कर्ज की पहचान और उनके समाधान के लिए संस्थागत तंत्र वास्तव में बैंकिंग प्रणाली (banking system) से फंसे कर्ज को साफ करने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।

2018-19 में फंसे कर्ज में 31,168 करोड़ रुपये की गिरावट

वहीं उन्होंने कहा कि अधिकारियों को इसी दिशा में काम करना जारी रखना चाहिए। भारतीय बैंकिंग प्रणाली (indian banking system) से जुड़े एक सवाल के जवाब में आईएमएफ (IMF) के मौद्रिक एवं पूंजी बाजार विभाग (Monetary and capital market department) के निदेशक और वित्तीय सलाहकार टोबिस एड्रियन ने कहा कि भारत में गैर - निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) का स्तर ऊंचा बना रहेगा।

हालांकि इस मोर्चे पर कुछ सुधार हुआ है लेकिन हम भारत में एनपीए (NPA) को कम करने में और प्रगति का स्वागत करेंगे। भारत सरकार ने फरवरी में कहा था कि अप्रैल - दिसंबर 2018-19 में फंसे कर्ज में 31,168 करोड़ रुपये की गिरावट हुई। इसकी तुलना में मार्च 2018 के अंत में फंसा कर्ज 8,95,601 करोड़ रुपये था।

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