Jet Airways पिछले काफी दिनों से कंपनी वित्तय संकट (financial problem) से जूझ रही है। हाल ही में कंपनी के चेयरमैप नरेश गोयल (chairman naresh goyal) ने इस्तीफा (Resignation) दिया है।
नई दिल्ली: Jet Airways पिछले काफी दिनों से कंपनी वित्तय संकट (financial problem) से जूझ रही है। हाल ही में कंपनी के चेयरमैप नरेश गोयल (chairman naresh goyal) ने इस्तीफा (Resignation) दिया है। चेयरमैन पद से इस्तीफे के बाद भी जेट एयरवेज की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इसी बीच कर्ज संकट से जूझ रही निजी विमानन कंपनी जेट एयरवेज (Jet Airways Private Aviation) को उसके पायलट (pilot) 1 अप्रैल से तगड़ा झटका देने की तैयारी में हैं। शुक्रवार तक बैंकों (bank) ने कंपनी में पूंजी निवेश (money investment) नहीं किया, जिसके बाद पायलटों के संगठन ने कहा कि कंपनी के 1,000 से ज्यादा पायलट 1 अप्रैल से विमान नहीं उड़ाने के अपने पुराने फैसले पर कायम हैं। शुक्रवार को पायलटों के एक संगठन (Organization)ने इस बारे में जानकारी दी।

पायलट अब कानूनी कदम उठाने के बारे में सोच रहे
नेशनल एविएटर्स गिल्ड (National Aviators Guild)(एनएजी) ने पिछले सप्ताह कहा था कि अगर कंपनी के पायलटों का बकाया भुगतान नहीं हुआ और 31 मार्च तक पुनरुद्धार योजना स्पष्ट नहीं हुई, तो पायलट पहली अप्रैल से विमान नहीं उड़ाएंगे। एनएजी का दावा है कि वह जेट एयरवेज के 1,000 से ज्यादा पायलटों का प्रतिनिधित्व करता है। इस बीच, जेट के 200 से ज्यादा पायलटों ने कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को पत्र लिखकर बकाये वेतन को लेकर गंभीर चिंता जताई है। बता दें कि सूत्रों के मुताबिक बकाया भुगतान को लेकर जेट के पायलट अब कानूनी कदम उठाने के बारे में सोच रहे हैं।
कंपनी की खराब हालत होने के कारण हाल ही में नरेश गोयल और उनकी पत्नी ने जेट एयरवेज के बोर्ड और चेयरमैन पद से इस्तीफा दे चुकी हैं। लेकिन कंपनी की राह केवल उनके इस्तीफे से आसान नहीं होने वाली। प्रतिद्वंद्वी विमानन सेवा कंपनियों स्पाइसजेट (SpiceJet) और इंडिगो प्राइस वॉर (Indigo price war) को जारी रख सकती है। ऐसे में आने वाले समय में जेट में कई और संकट खड़े होंगे।
इस बात की जानकारी दें कि एसबीआई (sbi) की अगुवाई में नकदी संकट से जूझ रही जेट एयरवेज के कर्मचारियों का भुगतान लंबित है, जिसके लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय से विचार-विमर्श कर एक योजना बनाई थी। वहीं ईंधन के दाम में इजाफा और भारी प्रतिस्पर्धा के कारण जेट एयरवेज पिछले छह महीनों से नकदी संकट से जूझ रही है। इतना ही नहीं कंपनी ने पट्टेदारों, हवाई अड्डा संचालकों और तेल कंपनियों को भुगतान करने में भी देरी की है।
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