सरकार को अधिक-से-अधिक रोजगार सृजित (Employment Generated) करने के लिये श्रम गहन क्षेत्रों (Labor intensive areas) पर ध्यान देने की जरूरत है।
नई दिल्ली: सरकार को अधिक-से-अधिक रोजगार सृजित (Employment Generated) करने के लिये श्रम गहन क्षेत्रों (Labor intensive areas) पर ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि विकास के मौजूदा मॉडल के तहत रोजगार बड़ा मुद्दा बना है। और ऐसे में असमानता और गरीबी उन्मूलन (Inequality and poverty eradication) पर काम करने वाली संस्था ऑक्सफैम इंडिया (Oxfam India) की 'विषमता पर ध्यान दें (Focus on Asymmetry)- भारत में रोजगार की स्थिति' (Employment status in India) शीर्षक से जारी रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
आपको बता दें किरिपोर्ट के मुताबिक, गुणवत्तापूर्ण रोजगार का अभाव और वेतन में बढ़ती विषमता भारतीय श्रम बाजार में असमानता का प्रमुख कारण है। ऑक्सफैम इंडिया (Oxfam India) के सीईओ अमिताभ बेहर ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि रोजगार सृजन और स्त्री-पुरूष समानता के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति काफी अलग है। वास्तव में हम जो देख रहे हैं, वह बहुत दु:खद और परेशान करने वाली स्थिति है। इसमें स्थानीय संरचनात्मक कारण हैं, जिससे रोजगार बाजार या देश में रोजगार Employment के संदर्भ में स्थिति बिगड़ी है।
महिला कर्मचारियों की स्थिति ज्यादा नाजुक
आपको इस बात से अवगत करा दें कि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महिला कर्मचारियों (women workers) की स्थिति ज्यादा नाजुक है। रिपोर्ट के अनुसार औसतन महिलाओं को उसी कार्य के लिए समान रूप से पढ़े-लिखे पुरुष सहयोगियों के मुकाबले 34 प्रतिशत कम वेतन (less salary) मिलता है। नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस के 2011-12 के अनुमान के अनुसार, निश्चित वेतन पाने वाली महिलाओं ने शहरी क्षेत्रों में पुरुषों से 105 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 123 रुपये कम प्राप्त किए।
हाल ही में हुए सर्वे के मुताबिक, देश में महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले कम वेतन मिलता है। लेटेस्ट मॉनस्टर सैलरी इंडेक्स (MSI) के मुताबिक, देश में मौजूदा जेंडर पे गैप यानी पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को 19 फीसदी कम वेतन मिलता है यानी पुरुष महिलाओं की तुलना में हर घंटे 46 रुपये 19 पैसे ज्यादा पाते हैं।
महिलाओं को 26 फीसदी कम वेतन
वहीं 2018 में देश में पुरुषों की औसत सैलरी हर घंटे 242.49 रुपये थी वहीं महिलाओं को हर घंटे सिर्फ 196.3 रुपये ही मिल रहे हैं। सर्वे के मुताबिक, कई अहम इंडस्ट्री में यह सैलरी के मामले में यह भेदभाव काफी ज्यादा है। IT/ITES सर्विसेज में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को 26 फीसदी कम वेतन जबकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में महिलाओं को 24 फीसदी कम वेतन मिल रहा है।
इस तरह की पहल करने की जरूरत
बता दें कि सीईओ अमिताभ बेहर बेहर ने आगे कहा कि यह गलत नीतियों और सामाजिक सुरक्षा एवं इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश की कमी का नतीजा है। रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया कि रोजगार क्षेत्र में असमानता को दूर कैसे किया जाए। इसके लिए अधिक रोजगार सृजित करने के लिए हमारा जोर श्रम गहन क्षेत्रों की तरफ होना चाहिए। साथ ही पड़ोसी व वैश्विक प्रतिस्पर्धी देशों में समान रूप से प्रतिस्पर्धी होने के लिए देश में बेहतर एवं प्रासंगिक कौशल विकास के अवसर होने चाहिए। इसके अलावा, प्रगतिशील टेक्सेशन पर जोर होना चाहिए व कंपनी कर में छूट देने को लेकर जो अतिरिक्त उत्साह पैदा हो रहा है, उसमें कमी लाई जानी चाहिए। इस तरह से जो अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो उसका उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य व समाजिक सुरक्षा सुधारने के लिए करना चाहिए।
दूसरे देशों का मॉडल लागू करना संभव नहीं
मौके पर मौजूद नीति अनुसंधान और अभियान की निदेशक रेणु भोगल ने कहा कि हमारे देश में जिस प्रकार की वर्क फोर्स है। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि हम उस मॉडल को नहीं अपना सकते हैं जो अन्य देश इस्तेमाल करते हैं। आखिर हमें बड़े पैमाने पर मशीनीकरण क्यों अपनाना चाहिए? वास्तविकता यह है कि आपको श्रम गहन उद्योग और अवसरों की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम वास्तव में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संकट में फंस जाएंगे।
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