नई दिल्ली। पिता को बचपन में खोने के बाद मां के जेवर बेच कर शुरू की गई जेट ऐयरवेज (jet airways) से आज कंपनी के संस्थापक नरेश गोयल (naresh goyal) को बेआबरू होकर निकलना पड़ा। बढ़ते कर्ज के चलते उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा था। बैंकों और एतिहाद एयरलाइंस के अल्टीमेटम के बाद उन्होंने आज कपंनी के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया। उनकी पत्नी अनिता गोयल ने भी जेट ऐयरवेज (jet airways) के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है। चर्चा के अनुसार जो डील हुई है उसके मुताबिक एतिहाद एयरवेज (Etihad Airways) का हिस्सा 24 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी किया जाएगा। नरेश गोयल (naresh goyal) का हिस्सा 51 फीसदी से घटाकर 25.5 फीसदी किया जाएगा। कर्ज देने वालों का हिस्सा 50.5 फीसदी होगा। इसका मतलब कंपनी अब बैंकों की हो जाएगी।

1974 में शुरू हई थी जेट एयरवेज
अभी तक जेट एयरवेज के चेयरमैन रहे नरेश गोयल (naresh goyal) ने बेहद कठिन परिस्थिति में अपनी मां के जेवर बेचकर ट्रैवल एजेंसी शुरू की थी। नरेश गोयल ने 1967 में अपनी मां के एक चाचा की एजेंसी में कैशियर के रूप में काम शुरू किया था। तब उन्हें 300 रुपये की सैलरी मिलती थी। यहां काम करते हुए रॉयल जॉर्डन एयरलाइंस जैसे कई बड़ी कंपनियों में काम करने का उन्हें मौका मिला। बाद में 1974 को उन्होंने अपनी ट्रैवल एजेंसी शुरू की और उसका नाम जेट एयरवेज रखा। यही कंपनी बाद में जेट एयरवेज (jet airways) बनी, जिसके बोर्ड से नरेश गोयल (naresh goyal) और उनकी पत्नी अनिता गोयल को इस्तीफा देना पड़ा।
ट्रैवल एजेंसी शुरू करने के लिए नहीं थे पैसे
जेट एयरवेज (jet airways) नाम से ट्रैवल एजेंसी शुरू करने के लिए नरेश गोयल (naresh goyal) के पास पैसे नहीं थे। उन्होंने अपनी मां से बात की। बत मां ने अपने जेवर देकर कहा, इन्हें बेच दो। जेवर बेचने से उन्हें करीब 15 हजार रुपये मिले थे। उन्होंने इन्हीं में से 10 हजार रुपये लगाकर जेट एयर ट्रेवल एजेंसी शुरू की थी।
बाद में यही कंपनी एयरलाइंस बनी
साल 1991 के बाद जेट एयरवेज (jet airways) के लिए रास्ता खुलना शुरू हुआ। उस वक्त भारत सरकार ने ओपन स्काई पॉलिसी को हरी झंडी दी और नरेश गोयल (naresh goyal) ने इस मौके का फायदा उठाया और डोमेस्टिक ऑपरेशन के लिए 1993 में जेट एयरवेज (jet airways) की शुरुआत की। कंपनी लगातार अपने काम को बढ़ाती रही और एक वक्त पर जब कंपनी अपने शीर्ष पर थी तब नरेश गोयल देश के 20 सबसे अमीर शख्सियत में शुमार हुआ करते थे। लेकिन 25 साल बाद देश की सबसे पुरानी प्राइवेट एयरलाइन जेट एयरवेज की कमान इसके फाउंडर नरेश गोयल के हाथों से निकल गई। जेट एयरवेज पर बैंकों का 8,200 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है।
बचपन गरीबी में गुजरा
पंजाब में जन्में नरेश गोयल (naresh goyal) का बचपन काफी गरीबी में बीता था। उनके पिता का निधन उनके बचपन में ही हो गया था। उनके पिता का ज्वैलरी का कारोबार था। उनके पिता के न रहने पर बाद में आर्थिक दिक्कतों के चलते उनका घर नीलाम हुआ था। बाद में उनकी मां नरेश को लेकर अपने एक अंकल के घर पर रहने के लिए चली गईं थीं।
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