For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts

    अब गेहूं किसानों के रोने की बारी, देखें क्या करती है सरकार

    |

    नई दिल्ली। सर्दी के मौसम में विस्तार और मार्च के शुरू में बारिश ने इस साल गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन होने की उम्मीद जगाई है, मगर किसान इस बात से चिंतित है कि उत्पादन ज्यादा होने से उनको फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पाएगा। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल गेहूं का उत्पादन 10.5 करोड़ टन हो सकता है। केंद्र सरकार ने फसल वर्ष 2018-19 में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य पिछले साल से 105 रुपये बढ़ाकर 1,840 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। किसान चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द गेहूं की खरीद शुरू, नहीं तो उनको नुकसान उठाना पड़ेगा।

    अब गेहूं किसानों के रोने की बारी, देखें क्या करती है सरकार

    काफी ज्यादा है गेहूं का भंडार
    भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास फरवरी में 239.31 लाख टन गेहूं का भंडार था जबकि पिछले साल फरवरी में एजेंसी के भंडार में 175.47 लाख टन गेहूं था। इस साल भंडार ज्यादा होने से गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई। अगर, सरकारी खरीद कम होती है तो गेहूं का बाजार भाव लुढ़क जाएगा, जिससे किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पाएगा। केंद्र सरकार ने फसल वर्ष 2018-19 में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य पिछले साल से 105 रुपये बढ़ाकर 1,840 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।

    जल्द शुरू हो जाएगी गेहूं की कटाई

    पंजाब के मानसा जिला स्थित बरेटा के किसान नजर सिंह ने कहा, "अगर, सरकार ने समय पर खरीद शुरू नहीं की तो हमें बाजार भाव पर गेहूं बेचना पड़ेगा जोकि आपूर्ति ज्यादा होने कम हो सकता है।" अधिकारियों ने बताया कि मध्यप्रदेश के कुछ इलाकों में गेहूं की कटाई शुरू हो चुकी है और अप्रैल के पहले सप्ताह से देशभर में गेहूं की कटाई शुरू हो जाएगी।

    यह भी पढ़ें : reliance jio सहित जानें अन्य कंपनियों के सबसे अच्छे प्रीपेड रिचार्ज प्लान

    भाव मिलना कठिन होगा

    किसान नेता केदार सिरोही ने कहा कि मौजूदा बाजार भाव के अनुसार बेहतर दाम मिलने की उम्मीद की जा सकती है, लेकिन आपूर्ति बढ़ने पर आमतौर पर व्यापारियों की रणनीति बदल जाती है, इसलिए कीमतों में गिरावट आ सकती है। कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने कहा कि किसान ज्यादा फसल उपजाते हैं तो उतनी आय नहीं मिलती है जितनी वह उम्मीद करते हैं इसलिए सही दाम पाने के लिए उनको उत्पादन में कटौती करनी पड़ती है। उन्होंने कहा, "अगर वे लाभकारी मूल्य चाहते हैं तो उनको उत्पादन में कम से कम 10 फीसदी कटौती करनी चाहिए। यह राष्ट्रविरोधी नहीं है। आखिर उनको आजीविका के लिए जद्दाजहद करनी पड़ती है।"

    यह भी पढ़ें : Bank जीरो बैलेंस में भी खोलते हैं बच्चों के नाम अकाउंट, जानें फीचर्स

    रिकॉर्ड बन सकता है

    भारतीय गेहूं व जौ अनुसंधान केंद्र के निदेशक जी.पी. सिंह ने कहा कि इस साल 10 करोड़ टन से ज्यादा गेहूं का उत्पादन होने का सपना पूरा होगा। उन्होंने कहा, "सर्दी के मौसम में विस्तार और मार्च के पहले सप्ताह में बारिश होने से गेहूं के लिए मौसमी दशा अनुकूल हो गई, जिससे ज्यादा उत्पादन होने की उम्मीद है।" उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि इस साल 10.5 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन हो सकता है।"

    यह भी पढ़ें : ये है डीजल का रेट बदलने का फार्मूला, जो काटता है आपकी जेब

    ये है सरकारी आंकड़ा

    हालांकि केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से पिछले महीने जारी फसल वर्ष 2018-19 की प्रमुख फसलों के दूसरे अग्रिम उत्पादन अनुमान के अनुसार, इस साल गेहूं का उत्पादन 991.2 लाख टन हो सकता है। चीन के बाद भारत दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है। पिछले साल के दूसरे अग्रिम उत्पादन अनुमान के अनुसार देश में गेहूं का उत्पादन 971.1 लाख टन था। पिछले साल सरकारी एजेंसियों ने 358 लाख टन गेहूं की खरीद की थी।

    यह भी पढ़ें : यह भी पढ़ें : Indian Oil दे रहा सस्ता Petrol, 31 मार्च तक है ऑफर

    English summary

    Fear of lower price of wheat because Expect more wheat production Wheat farmer in hindi

    Wheat growing farmers fear that due to higher production this time, they will get low prices of wheat.
    Story first published: Friday, March 15, 2019, 13:15 [IST]
    Company Search
    Enter the first few characters of the company's name or the NSE symbol or BSE code and click 'Go'
    Thousands of Goodreturn readers receive our evening newsletter.
    Have you subscribed?

    Find IFSC

    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Goodreturns sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Goodreturns website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more