Mutual Fund : जानें निवेश का सही तरीका जो बना सकता है करोड़पति

नई दिल्ली। म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) में आजकल सबसे तेजी से निवेश बढ़ रहा है। लेकिन अभी लोगों को म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश का सही तरीका नहीं मालूम है। यही कारण है कि लोग म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश (investment) करने के बाद भी इसका पूरा फायदा नहीं उठा पाते हैं। जबकि म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) में थोड़ा थोड़ा निवेश भी करोड़पति बना सकता है। म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) में अगर कोई 100 रुपये रोज के हिसाब से भी निवेश करें तो अपनी जिंदगी में करोड़पति बन सकता है। म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) लोगों निवेश में हर तरह की सुविधा देता है। यहां पर 500 रुपये महीने के न्यूनतम निवेश से लेकर कितना भी पैसा लगाया जा सकता है। यही नहीं पैसा एक बार में हर माह भी लगाने का विकल्प होता है। इसके अलावा म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) से पैसा निकालना भी काफी आसान होता है। आइये सबसे पहले जानते हैं कि म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) के अलावा बैंक और पोस्ट ऑफिस में समान निवेश पर कितना तैयार होगा फंड।

Mutual Fund

1 करोड़ रुपये का कैसे तैयार होगा फंड
देश में निवेश के लिए 3 ही जगह हैं। एक है म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund), दूसरा बैंक (bank) और तीसरा पोस्ट ऑफिस (post office)। जहां बैंक और पोस्ट ऑफिस में ब्याज मिलता है, वहीं म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) में मार्केट लिंक रिटर्न मिलता है। हालांकि एक बात याद रखना चाहिए कि बैंक और पोस्ट ऑफिस में भी ब्याज दरें बदलती रहती हैं।

म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) में ऐसे तैयार होगा 1 करोड़ रुपये का फंड

म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) में ऐसे तैयार होगा 1 करोड़ रुपये का फंड

-म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) में अगर कोई व्यक्ति अगर 100 रुपये रोज यानी 3000 महीना का निवेश करे तो 30 साल में एक करोड़ रुपये का फंड तैयार हो जाएगा। यह गणना सालाना 12 फीसदी रिटर्न पर आधारित है।

-हालांकि म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) में रिटर्न एक समान नहीं रहता है, लेकिन लम्बे समय में यहां पर 12 फीसदी से भी ज्यादा का रिटर्न मिला है। ऐसे में अगर 15 फीसदी तक का रिटर्न मिले तो केवल 1800 रुपये का 30 साल तक का निवेश भी 1 करोड़ रुपये का फंड तैयार करा सकता है।

जानें 5 साल में म्युचुअल फंड (MF) में सिप (SIP) में अच्छा रिटर्न देने वाली स्कीम
1 कैनरा रोबेको इमर्जिंग इक्विटी फंड का रिटर्न 20 फीसदी से ज्यादा रहा है।
2 डीएसपी स्मॉल कैप का रिटर्न 17 फीसदी से ज्यादा रहा है।
3 फ्रैंकलिन इंडिया स्मॉलर कंपनीज फंड का रिटर्न भी 17 फीसदी से ज्यादा रहा है।
4 प्रिंसपल इमर्जिंग ब्लूचिप फंड का रिटर्न भी 17 फीसदी से ज्यादा का रहा है।
5 एचडीएफसी मिडकैप अपर्च्युनिटी फंड का रिटर्न भी 17 फीसदी से ज्यादा का रहा है।

डाटा : 27 फरवरी 2019 तक का अपडेट। 5 साल का रिटर्न कंपाउंडिड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) में।

अब जानें इतने ही निवेश से बैंक (bank) और पोस्ट ऑफिस (post office) में कितना तैयार होगा फंड

अब जानें इतने ही निवेश से बैंक (bank) और पोस्ट ऑफिस (post office) में कितना तैयार होगा फंड

-बैंक (bank) और (post office) में तय ब्याज मिलता है। पिछले कुछ सालों का औसत निकालें तो यह 8 फीसदी से ज्यादा नहीं है। इसलिए अब जानते हैं कि बैंक और पोस्ट ऑफिस में कितना तैयार होगा फंड

-बैंक (bank) और (post office) में अगर कोई आरडी (RD) माध्यम से लगातार 30 साल तक हर माह 3000 रुपये जमा करता है और उसे 8 फीसदी ब्याज मिलता है तो 30 बाद उसे करीब 44 लाख रुपये मिलेगा। वहीं अगर 1800 रुपये महीने का 30 साल तक निवेश किया जाएगा तो मात्र 26 लाख रुपये का ही फंड तैयार होगा।

इसीलिए म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) स्‍मार्ट इन्‍वेस्‍टमेंट कहलाता है

इसीलिए म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) स्‍मार्ट इन्‍वेस्‍टमेंट कहलाता है

म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) का नाम मन में आते ही लोग रि‍स्‍क के बारे में सोचने लगते हैं। लेकिन इस बात को समझने की जरूरत है कि यहां पर निवेश शेयर बाजार की तरह रिस्‍की नहीं है। अगर आप अपना पूरा पैसा कि‍सी एक कंपनी में निवेश कर दें और कि‍सी वजह से वह कंपनी डूब जाए तो आपका सारा पैसा भी डूब जाएगा, लेकिन अगर आपने म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) के माध्‍यम से पैसा लगाया है तो आपके साथ ऐसा नहीं होगा। म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) में आपके पैसे को अलग-अलग कंपनि‍यों में लगाया जाता है। इसमें आपका पैसा अलग-अलग शेयर और बॉन्‍ड्स में इन्‍वेस्‍ट कि‍या जाता है। इसका फायदा यह है कि‍ अगर कि‍सी एक कंपनी में लगा पैसा दिक्‍कत में भी आ जाए तो बाकी जगह पर लगा हुआ पैसा उसे कवर कर ले और आपको नुकसान न हो।

रिस्‍क लेने की क्षमता के चुने म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund)

रिस्‍क लेने की क्षमता के चुने म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund)

म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) रिस्‍क लेने की क्षमता के अनुसार निवेश का विकल्‍प देते हैं। म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) को तीन कैटेगरी में बांट कर देखा जा सकता है, जिसमें हाई रि‍स्‍क, मीडि‍यम रि‍स्‍क और लो रि‍स्‍क की कैटेगरी आती है। ऐसे में अगर आप म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश के समय हाई रि‍स्‍क का ऑप्‍शन चुनेंगे तो आपको रि‍स्‍क बहुत ज्‍यादा होगा। लेकि‍न इसमें फायदा यह है कि‍ आपको अगर फायदा हुआ तो रि‍टर्न भी बहुत अच्‍छा मि‍लेगा। वहीं अगर आप मीडि‍यम रि‍स्‍क का ऑप्‍शन चूज करेंगे तो आपको मीडि‍यम लेवल का जोखि‍म उठाना पड़ेगा, वहीं, आपको रि‍टर्न पर फायदा भी मीडि‍यम लेवल का ही मि‍लेगा। इसके अलावा लो लेवल रि‍स्‍क जोन में भी अगर आप मि‍नि‍मम रि‍स्‍क का ऑप्‍शन चुनते हैं तो आपको रि‍टर्न भी न्‍यूनतम ही मि‍लेगा। इस प्रकार म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में आप अपना रि‍स्‍क खुद चुन सकते हैं।

इनकम टैक्‍स भी बचाते हैं म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund)

इनकम टैक्‍स भी बचाते हैं म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund)

म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) में आप इनकम टैक्‍स (income tax) बचाने के लिए भी निवेश कर सकते हैं। जब आप म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश करते हैं तो आपके पास दो विकल्प होते हैं। इसमें एक ऑप्‍शन है कि‍ रेगुलर फंड में निवेश करें और दूसरा यह है कि‍ आप टैक्‍स सेवर फंड (tax saver mutual fund) में नि‍वेश करें।

दोनों तरीकों में अंतर
म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) के इन दोनों तरीकों में कुछ अंतर है. जहां रेगुलर फंड में नि‍वेश शुरू करने के कुछ महीने बाद ही आप जरूरत पड़ने पर अपना पैसा निकाल सकते हैं, वहीं टैक्‍स सेवि‍ंग म्‍युचुअल फंड (ELSS) में 3 साल तक यह पैसा लॉकइन पीरि‍यड में होता है। इस लॉकइन पीरि‍यड के दौरान आप अपना पैसा निकाल नहीं सकते हैं। हालांकि देश में जितने भी इनकम टैक्‍स (income tax) बचाने वाले तरीके हैं उनमें सबसे कम लाइकन पीरियड (Income Tax Lockin Period) टैक्‍स सेविंग म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) का ही सबसे कम है।

टैक्‍स सेविंग फंड (Tax Saving Mutual Fund)

टैक्‍स सेविंग फंड (Tax Saving Mutual Fund)

टैक्‍स सेविंग म्यूचुअल फंड (Tax Saving Mutual Fund) इनकम टैक्‍स अधिनियम की धारा 80C के तहत निवेश पर आयकर में छूट (Income tax rebate) का फायदा भी देता है। इसका मतलब है कि ऐसे म्यूचुअल फंड (Tax Saving Mutual Fund) में निवेश पर आप आयकर की छूट (Income tax rebate) ले सकते हैं।

म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश पर कैसे मिलती है सुरक्षा

म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश पर कैसे मिलती है सुरक्षा

म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) के नि‍यमन (रेगुलेशन) का काम भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) करती है। ऐसे में सेबी (SEBI) की ओर से बनाई गई गाइड लाइन का म्यूचुअल फंड कंपनियां (Mutual fund companies) को पालन करना होता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि निवेशकों को अनुचित और गलत तरीके से मि‍स गाइड नहीं कि‍या जाए। ऐसे में यह गाइड लाइन निवेशक और म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) प्रदाता दोनों के पक्ष में काम करती हैं। म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) के बारे में और जानकारी के लिए एसोसिएशन ऑफ म्‍युचुअल फंड इन इंडिया (amfi) की बेवसाइट पर जाकर ली जा सकती है।

SIP या एकमुश्‍त कर सकते हैं निवेश

SIP या एकमुश्‍त कर सकते हैं निवेश

म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश में दो विकल्‍प मिलते हैं। एक में पैसा एक साथ लगा सकते हैं, जबकि दूसरे में हर माह निवेश का विकल्‍प का मिलता है। हर माह निवेश के विकल्प को सिस्‍टेमैटिक इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान (SIP) कहते हैं। अगर आपके पास एक साथ बड़ी रकम नहीं है तो आप सि‍स्‍टमैटि‍क इनवेस्‍टमेंट प्‍लान (SIP) के माध्‍यम से निवेश शुरू कर सकते हैं। म्‍युचुअल फंड की कई स्‍कीम 500 रुपये से निवेश की शुरुआत की अनुमति देती हैं।

जानें म्युचुअल फंड में सिप क्या है (What is SIP)
म्युचुअल फंड (mutual fund) में निवेश के एक तरीके को सिस्टेमेटिक प्लान (Sistmatic Investment Plan) यानी सिप (SIP) कहते हैं। सिप (SIP) में किसी म्यूच्यूअल फंड में एक निश्चित अंतराल पर लगातार निवेश किसा जाता है। दरअसल यह करीब करीब पोस्ट ऑफिस (Post office) की आरडी (RD) की तरह होता है। इस तरह का निवेश शेयर बाजार मे होने वाले उतार चढ़ाव का म्युचुअल फंड (mutual fund) पर पड़ने वाले निगेटिव प्रभाव को कम करता है और रिटर्न का बढ़ाने में मदद करता है।

सिप (SIP) से निवेश में आसानी
सिप (SIP) माध्यम से निवेश करने मैं बहुत ही आसानी है। इसमें निवेश करने के लिए आपको चुने गए म्युचुअल फंड (mutual fund) को अपने बैंक अकाउंट से लिंक करना होता है। इससे आपकी तरफ से तय की गई तारीख को आपकी तरफ से तय की गई रकम आपके बैंक अकाउंट से अपने आप ही कट कर म्युचुअल फंड कंपनी में चली जाती है। सिप (SIP) शुरू करने के बाद यह पूरा प्रोसेस अपने आप हर माह होता रहता है।

सिप (SIP) से घटता है निवेश का जोखिम
म्युचुअल फंड (mutual fund) में सिस्टेमेटिक प्लान (Sistmatic Investment Plan) यानी सिप (SIP) माध्यम से निवेश करने से जोखिम कम होता है और ज्यादा लाभ मिलने का चांस बढ़ जाता है। जब भी हम किसी म्युचुअल फंड में सिप (SIP) के माध्यम से निवेश करते हैं तो हमारा पैसा एक निश्चित अंतराल पर म्यूच्यूअल फंड (mutual fund) में निवेश होता है जो शेयर बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करता है। इसके अन्य फायदे जानते हैं

छोटे रकम से निवेश
अगर आप के पास एकमुश्त रकम नहीं है तो सिप (SIP) की शुरुआत केवल 500 रुपये से भी हो सकती है। बाद में धीरे धीरे यही छोटी रकम एक दिन बड़ी रकम का रूप ले लेगी।

कम रिस्क
सिप (SIP) में एक निश्चित अंतराल पर रकम म्यूच्यूअल फंड (mutual fund) में डाली जाती है। इससे मार्केट में होने वाली है उतार-चढ़ाव मे होने वाले जोखिम को कम करता है। इसे समझने के लिए एक उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए आपके पास 1,00000 रुपये निवेश करने के लिए है। और इस रकम को आप एक साथ निवेश ना करके आप इस रकम को 10,000-10,000 हजार रुपये की 10 किस्त में हर महीने जमा करते हैं यानी हर महीने 10,000 हजार रुपये का निवेश करते हैं। ऐसे में शेयर बाजार मे होने वाले उतार चढ़ाव को एवरेज करने का मौका आपको 10 बार मिलेगा, जो आपका रिस्क कम कर देगा।

म्‍युचुअल फंड (Mutual fund) से जुड़े शब्‍द

म्‍युचुअल फंड (Mutual fund) से जुड़े शब्‍द

एनएवी (NAV) (Net Asset Value) : जब भी म्यूचुअल फंड (Mutual fund) की बात होती है तब एक टर्म जो बार-बार प्रयोग में आती है, वह है- NAV. एक म्यूचुअल फंड (Mutual fund) कई जगह पैसे निवेश करता है इसलिए अगर किसी समय फंड से पैसा वापस लेना है तो यह उसकी NAV पर निर्भर करता है। अगर बेचना न भी हो तो फंड में पैसे के बारे में जानने के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है। किसी म्यूचुअल फंड (Mutual fund) की NAV वो कीमत है जिससे उस फंड की एक यूनिट खरीदी या बेची जा सकती है।

ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी एसेट (Asset Management Company) (AMC) : मैनेजमेंट कंपनी वह कंपनी होती है जो अलग-अलग प्रकार की म्यूचुअल फंड (Mutual fund) स्कीम लेकर बाजार में आती हैं। जैसे रिलायंस ग्रोथ फंड (म्यूचुअल फंड स्कीम) को रिलायंस कैपिटल ऐसेट मैनेजमेंट लिमिटेड ने लॉन्च किया, जो एक एएमसी यानी ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी है।

पोर्टफोलियो मैनेजर (Portfolio Manager) : एक बार अगर आपका पैसा म्यूचुअल फंड (Mutual fund) स्कीम में चला गया, तब उस धन का प्रबंधन पोर्टफोलियो मैनेजर करते हैं। वे आपके धन को शेयर या फिर बॉन्ड में निवेश करते हैं, यह निवेश आपकी स्कीम कैसी है उस पर निर्भर करता है। अगर स्कीम के नजरिये से देखा जाये तो उनके निर्णय बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि वे सिर्फ आपका नहीं, बल्कि आपके जैसे हजारों लोगों के धन का प्रबंधन करता है।

म्‍युचुअल फंड इंट्री लोड (MF Entry load) : म्‍युचुअल फंड इंट्री लोड एक महत्वपूर्ण शब्द है, जो हर म्यूचुअल फंड (Mutual fund) निवेशक के सामने आता है। एंट्री लोड और एक्ज‍िट लोड यानी जब आप निवेश कर रहे हैं, उस वक्त पड़ने वाला शुल्क और जब आप स्कीम से बाहर निकल रहे हैं, उस वक्त पड़ने वाला शुल्क, जब आप म्चूचुअल फंड (Mutual fund) खरीदते हैं तब कई बार आपको एनएवी से ज्यादा पैसा देना पड़ता है। और बेचते वक्त हो सकता है आपको कम एनएवी मिले. हालांकि यह निवेशकों के लिये अच्छा नहीं होता।

म्‍युचुअल फंड पोर्टफोलियो (Mutual Fund Portfolio) : सभी शेयर और निवेश किया गया धन मिलकर पोर्टफोलियो बनता है, तो अगर कोई म्यूचुअल फंड स्कीम रिलायंस, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज ऑटो, आईडीबीआई बैंक और कुछ सरकारी बॉन्ड खरीदते हैं तो ये सभी एकत्र होकर एक पोर्टफोलियो बनते हैं।

एयूएम (AMU) : पूर्ण धन जो निवेश किया गया है, उस कुल धन को एसेट्स अंडर मैनेजमेंट यानी एयूएम कहते हैं। एयूएम (AMU) बाजार के वातावरण और निवेशकों के निवेश व धन निकालने की तीव्रता के हिसाब से घटता बढ़ता रहता है।

एसआईपी (SIP) : ज्यादातर ओपन एंडेड में आप हर महीने छोटे-छोटे निवेश कर सकते हैं या फिर तिमाही, छहमाही या सालाना भी। इसे सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) कहते हैं. यह बैंक के आवर्ती जमा की तरह कार्य करता है।

एनएफओ न्यू फंड ऑफर (NFO) : म्यूचुअल फंड (Mutual fund) के नये ऑफर होते हैं जिनकी फेस वैल्यू 10 रुपए होती है।

(नोट-निवेश सलाह ब्रोकरेज हाउस और मार्केट एक्सपर्ट्स के द्वारा दी गई हैं। कृपया अपने स्तर पर या अपने एक्सपर्ट्स के जरिए किसी भी तरह की सलाह की जांच कर लें। मार्केट में निवेश के अपने जोखिम हैं, इसलिए सतर्कता जरूरी है।)

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