अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आज महिलाएं एक दूसरे को शुभकामनाएं और संदेश भेजने में व्यस्त है।
International Women's Day : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आज महिलाएं एक दूसरे को शुभकामनाएं और संदेश भेजने में व्यस्त है। ये बात भी सच हैं कि 21वीं की सदी की महिलाओं के बारे में कहा जाता है कि वह पुरुषों से किसी भी मामले में कम नहीं हैं। आज वह पुरुषों के कंधे से कंधा मिलकर चल रही हैं। यहां तक की हर क्षेत्र में अपने आप को बेहतर साबित भी कर रही है। लेकिन इसी बीच आई एक ताजा सर्वेक्षण की रिपोर्ट कुछ और ही हाल बयां कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले 19 फीसदी कम वेतन मिलता है।
देश में महिलाओं और पुरुषों के बीच सैलरी के मामले में भेदभाव अभी भी बरकरार है। हालिया सर्वे के मुताबिक, देश में महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले 19 प्रतिशत कम वेतन मिलता है। लेटेस्ट मॉनस्टर सैलरी इंडेक्स (MSI) के मुताबिक, देश में मौजूदा जेंडर पे गैप यानी पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को 19 फीसदी कम वेतन मिलता है यानी पुरुष महिलाओं की तुलना में हर घंटे 46 रुपये 19 पैसे ज्यादा पाते हैं।

महिलाओं को 26 फीसदी कम वेतन
वहीं 2018 में देश में पुरुषों की औसत सैलरी हर घंटे 242.49 रुपये थी वहीं महिलाओं को हर घंटे सिर्फ 196.3 रुपये ही मिल रहे हैं। सर्वे के मुताबिक, कई अहम इंडस्ट्री में यह सैलरी के मामले में यह भेदभाव काफी ज्यादा है। IT/ITES सर्विसेज में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को 26 फीसदी कम वेतन जबकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में महिलाओं को 24 फीसदी कम वेतन मिल रहा है।
इन क्षेत्रों में भी महिलाओं का वेतन कम
चौंकाने वाली बात है कि सर्वे के मुताबिक, हेल्थकेयर, केयरिंग सर्विसेज और सोशल वर्क जैसे सेक्टरों में भी पुरुष, महिलाओं से 21 फीसदी ज्यादा वेतन पा रहे हैं। बता दें कि इन सेक्टरों में आमतौर पर महिलाओं का दबदबा माना जाता है।
बैंकिंग व इंश्योरेंस सेक्टर में पुरुष सिर्फ 2 प्रतिशत आगे
सर्वे में पता चला है कि बैंकिंग व इंश्योरेंस जैसी वित्तीय सर्विसेज सेक्टर में पुरुष महिलाओं की तुलना में सिर्फ 2 प्रतिशत ही ज्यादा कमा रहे हैं। सैलरी में भेदभाव का यह अंतर 10 साल के अनुभव के साथ सबसे ज्यादा हो जाता है। 10 साल के अनुभव वाले पुरुष, इसी अनुभव वाली महिलाओं के मुताबले 15 प्रतिशत ज्यादा कमा रहे हैं।
2017 में महिला और पुरुष में सैलरी के भेदभाव का यह अंतर 20 प्रतिशत था, जबकि 2017 में यह अंतर 1 प्रतिशत ही कम हुआ।
काम को लेकर महिलाओं से भेदभाव
MSI एक मुहिम है जिसे मॉनस्टर इंडिया Paycheck.in और आईआईएम-अहमदाबाद (रिसर्च पार्टनर) के साथ मिलकर चला रही है। मॉनस्टरडॉटकॉम ने देश में कामकाजी महिलाओं और वर्कप्लेस पर होने वाली चिंताओं को समझने के लिए विमन ऑफ इंडिया इंक सर्वे भी किया है। इस सर्वे में पता चला है कि करीब 71 प्रतिशत पुरुष और 66 प्रतिशत महिलाओं ने महसूस किया है कि उनके संस्थानों के लिए लैंगिक समानता पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। वहीं करीब 60 प्रतिशत महिलाओं का मानना है कि वर्कप्लेस पर उनके साथ भेदभाव किया जाता है।
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