भारत के साथ टकराव से जूझ रही पाकिस्तान (Pakistan) की आर्थिक हालत (Financial condition) इतनी खराब हो गई कि उसे एक बड़ा फैसला लेने को मजबूर होना पड़ गया है।
नई दिल्ली : भारत के साथ टकराव से जूझ रही पाकिस्तान (Pakistan) की आर्थिक हालत (Financial condition) इतनी खराब हो गई कि उसे एक बड़ा फैसला लेने को मजबूर होना पड़ गया है। प्रधानमंत्री इमरान खान की अगुआई वाली सरकार ने सरकारी विमानन कंपनी पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) और स्टील मिल्स सहित 48 कंपनियों को बेचने का ऐलान किया है। हालांकि सरकार इसे निजीकरण की प्रक्रिया बता रही है।

डेढ़ साल के भीतर 7 कंपनियों की बिक्री
निजीकरण पर सैय्यद मुस्तफा महमूद की अध्यक्षता में बनाई गई नेशनल असेंबली स्थायी समिति की एक बैठक में यह फैसला लिया गया। निजीकरण सचिव रिजवान मलिक ने बैठक में पाकिस्तान सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों के 5 वर्ष के लिए निजीकरण कार्यक्रम पेश किया। सचिव ने बैठक् में बताया कि डेढ़ साल के भीतर 7 कंपनियों की बिक्री होगी।
चीन और रूस की पांच से छह कंपनियों से बातचीत
इनमें दो एलएनजी संयंत्र हवेली बहादुरशाह और बालुकी ऊर्जा संयंत्र शामिल हैं। स्टील मिल्स के निजीकरण के लिए चीन और रूस की पांच से छह कंपनियों से बातचीत जारी है। इसे सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत बेचा जाएगा और प्रति वर्ष उत्पादन क्षमता में 11 लाख से 35 लाख टन की बढ़ोतरी की जाएगी।
40 हजार करोड़ के घाटे में पाकिस्तान एयरलाइंस
उन्होंने बताया कि पीआईए और स्टील मिल्स का घाटा 60 हजार करोड़ रुपए पर पहुंच चुका है। पीआईए के 40 हजार करोड़ रुपए के घाटे को देखते हुए इस राष्ट्रीय विमान सेवा को कोई खरीदना पसंद नहीं करेगा।
पाकिस्तानी जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ गया
आंतक की फैक्ट्री बने पाकिस्तान (pakistan) को इस बार भारत की सर्जिकल स्ट्राइक-2 (Surgical Strike 2) से भारी झटका लगा है। इसका असर इतना भयानक पड़ा है कि उसको संभलने में भी दिक्कत भी हो रही है। इससे पहले एक इंदिरा गांधी के समय में पाकिस्तान जब भारत से लड़ा था, तब उसके दो टुकड़े हुए थे और बंगलादेश बना था। इस बार मोदी सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक-2 (Surgical Strike 2) से पाकिस्तानी रुपया (Pakistani Rupee) दो टुकड़े में बंट गया है यानी उसकी कीमत भारतीय रुपये के मुकाबले अठन्नी रह गई है। वहीं आर्थिक कंगाली के चलते उधार में मिल रहे तेल का पैसा चुकाने के लिए पाकिस्तान (pakistan) को पेट्रोल डीजल और मिट्टी के तेल के रेट बढ़ाना पड़ा है। इसके असर से पाकिस्तानी जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ गया है।


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