टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने कंज्यूमर से लेकर ट्रेडिंग और इनवेस्टमेंट तक 10 वर्टिकल्स में 104 अरब डॉलर के इस ग्रुप को बांट दिया है।
टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने कंज्यूमर से लेकर ट्रेडिंग और इनवेस्टमेंट तक 10 वर्टिकल्स में 104 अरब डॉलर के इस ग्रुप को बांट दिया है। मामले से वाकिफ दो लोगों ने बताया कि होल्डिंग कंपनी के प्रतिनिधि इन वर्टिकल्स का कामकाज आसानी से चलाने के लिए को-ऑर्डिनेट कर रहे हैं।
वहीं चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की अध्यक्षता में ये वर्टिकल बनाने से 95 से ज्यादा कंपनियों को अपने कामकाज में तालमेल बैठाने और लागत घटाने में मदद मिलेगी। यह ग्रुप टाटा मोटर्स सरीखी अपनी कंपनियों में बहुत ज्यादा इंपेयरमेंट्स की स्थिति का सामना कर रहा है।

कंज्यूमर और रिटेल वर्टिकल को एकसाथ रखना मुश्किल
इसमें सबसे मुश्किल काम कंज्यूमर और रिटेल वर्टिकल को एकसाथ रखने का रहा है क्योंकि इन सेगमेंट्स में टाटा केमिकल्स, टाटा ग्लोबल बेवरेजेज, टाइटन, वोल्टास, क्रोमा और वेस्टसाइड सरीखी कंपनियां हैं। ग्रुप ने होटल और एविएशन से जुड़े अपने कारोबारों यानी इंडियन होटल्स, टाटा एसआईए एयरलाइन को ट्रैवल और टूरिज्म वर्टिकल में रखा है।
कंपनियों के बीच को-ऑर्डिनेटर और फैसिलिटेटर
यह कंसॉलिडेशन ऑपरेटिंग कॉस्ट कम करने और ग्रोथ बढ़ाने की टाटा संस की योजना के तहत किया गया है। हालांकि एक सीनियर अधिकारी ने कहा वर्टिकल हेड की भूमिका हर वर्टिकल की कंपनियों के बीच को-ऑर्डिनेटर और फैसिलिटेटर की रहेगी। वर्टिकल हेड जरूरी नहीं है कि टाटा संस बोर्ड का मेंबर ही हो, लेकिन वह ऐसा शख्स जरूर होगा, जिसे संबंधित सेक्टर की गहरी समझ हो और जिसमें कारोबार बढ़ाने की क्षमता हो। कुछ फंड मैनेजरों ने कहा कि वर्टिकल बनाने से ग्रुप की कंपनियों की क्षमता बेहतर होगी।
कंपनियों को एक-दूसरे की क्षमता से फायदा
बिड़ला सन लाइफ एसेट मैनेजमेंट के सीईओ ए बालासुब्रमण्यन का कहना हैं कि वर्टिकल बनाने से एक तरह के कारोबार वाली कंपनियों को एक-दूसरे की क्षमता से फायदा मिलेगा। उनका कहना हैं कि ऑपरेटिंग क्षमता निश्चित रूप से बढ़ेगी। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि हर कंपनी की कामकाजी स्वतंत्रता प्रभावित न हो, जो ग्रोथ हासिल करने के लिए जरूरी तेजी से कदम बढ़ा सकेंगी।
वहीं टाटा ग्रुप के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि कंसॉलिडेशन और रिस्ट्रक्चरिंग पर 'काम चलता रहेगा। वहीं उन्होंने कहा कि ये ऐसे मसले नहीं हैं, जिनका हल जल्द निकाला जा सके। कुछ को हल करने में कुछ महीने या एक साल का समय भी लग सकता है। हालांकि यह साफ है कि किस दिशा में बढ़ना है।
हालांकि टाटा कम्युनिकेशन (tata communication), टाटा स्काई (tata sky) और टाटा टेलिकॉम (tata telecom) एंड मीडिया वर्टिकल (media vertical) में रखा गया है। टाटा इंटरनैशनल (tata international) , टाटा इंडस्ट्रीज (tata industries) और टाटा इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन (tata investment corporation) को ट्रेडिंग एंड इनवेस्टमेंट (trading and investment) के तहत रखा गया है। टाटा संस के चेयरमैन ने इससे पहले कहा था कि यह कारोबारी प्रक्रिया आसान बनाने और तालमेल बढ़ाने की प्रक्रिया है।
ग्रुप में करीब 100 ऑपरेटिंग कंपनियां
इस बात की भी जानकारी दे कि टाटा ग्रुप के एक अन्य अधिकारियों का कहना हैं कि टाटा संस ने ग्रुप की कंपनियों से कर्ज घटाने, उनकी रिस्ट्रक्चरिंग करने, क्रॉस होल्डिंग्स को कंसॉलिडेट करने, स्ट्रैटेजिक एसेट्स खरीदने और पूंजी डालने में 2018 के दौरान 70000 करोड़ रुपये से ज्यादा लगाए थे। बता दें कि इस ग्रुप में करीब 100 ऑपरेटिंग कंपनियां हैं। इनमें से करीब 29 लिस्टेड हैं। इनकी 1000 से ज्यादा सब्सिडियरीज हैं।


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