नई दिल्ली। आंतक की फैक्ट्री बने पाकिस्तान (pakistan) को इस बार भारत की सर्जिकल स्ट्राइक-2 (Surgical Strike 2) से भारी झटका लगा है। इसका असर इतना भयानक पड़ा है कि उसको संभलने में भी दिक्कत भी हो रही है। इससे पहले एक इंदिरा गांधी के समय में पाकिस्तान जब भारत से लड़ा था, तब उसके दो टुकड़े हुए थे और बंगलादेश बना था। इस बार मोदी सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक-2 (Surgical Strike 2) से पाकिस्तानी रुपया (Pakistani Rupee) दो टुकड़े में बंट गया है यानी उसकी कीमत भारतीय रुपये के मुकाबले अठन्नी रह गई है। वहीं आर्थिक कंगाली के चलते उधार में मिल रहे तेल का पैसा चुकाने के लिए पाकिस्तान (pakistan) को पेट्रोल डीजल और मिट्टी के तेल के रेट बढ़ाना पड़ा है। इसके असर से पाकिस्तानी जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ गया है।

ये पाकिस्तान (pakistan) के रुपये का हाल
पिछले कुछ समय से पाकिस्तानी रुपया (Pakistani Rupee) डॉलर (dollar) के मुकाबले कमजोर चल रहा था। लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक-2 (Surgical Strike 2) के बाद से उसके रुपये की कमजोरी एकदम से बढ़ गई है। इस वक्त जहां पाकिस्तानी रुपया (Pakistani Rupee) 1 डालर (dollar) मुकाबले 139.88 रुपये के स्तर पर ट्रेड हो रहा है। वहीं सोमवार को भारत का रुपया डॉलर (dollar) के मुकाबले 70.90 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। ऐसे में अगर किसी के पास 1 डालर (dollar) है तो बदलने पर जहां पाकिस्तान का करीब 140 रुपये मिलेगा वहीं भारत का करीब 71 रुपये (rupee) मिलेगा। इस प्रकार पाकिस्तानी करेंसी की कीमत भारत की करेंसी के सामने करीब-करीब आधी रह गई है।
ये हैं pakistani rupee की कमजोरी का कारण
भारत से तनाव के दौरान पाकिस्तान (pakistan) से विदेशी निवेशकों ने तेजी पैसा निकालना शुरू कर दिया है। इसका असर जहां शेयर बाजार में गिरावट के रूप में सामने आया है वहीं पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार भी तेजी से गिरा है। पाकिस्तान (Pakistan) हर माह करीब 5 अरब डॉलर का आयात करता है और करीब 2 अरब डॉलर (dollar) का निर्यात करता है। इस प्रकार उसके पास हर माह अपने आयात बिल को चुकाने के लिए करीब 3 अरब डॉलर की अलग से जरूरत पड़ती है। वहीं पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में दिसंबर 2018 में 7.2 बिलियन डॉलर था। यानी अगर जनवरी और फरवरी का उसने आयात बिल चुका दिया है तो उसके पास मार्च में अपने आयात बिल को चुकाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
तनाव बढ़ने से पाकिस्तान दबाव में
पाकिस्तान (pakistan) इस अपने आयात का बिल चुकाने की स्थिति में नहीं है। इसलिए पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान ने साउदी अरब जाकर मदद की गुहार लगाई थी। इसके बाद साउदी अरब ने पाकिस्तान को तेल उधार में देने का वादा किया है। लेकिन इसके बाद भी उसे अपने खर्च को पूरा करने के लिए पेट्रोल (Petrol), डीजल (diesel) और मिट्टी का तेल (kerosene) के दाम को बढ़ाना पड़ा है। सर्जिकल स्ट्राइक-2 (Surgical Strike 2) के बाद पाकिस्तान (pakistan) ने पेट्रोल (Petrol) के दामों में 2.76 फीसदी की बढ़ोतरी की है। वहीं डीजल (diesel) की कीमतों में 4.45 फीसदी, केरोसिन में 4.85 और लाइट डीजल में 3.33 फीसदी का इजाफा किया गया है।
नए रेट
-पेट्रोल (Petrol) की कीमत 92.88 रुपये प्रति लीटर
-डीजल (diesel) का दाम 111.43 रुपये प्रति लीटर
-केरोसिन (kerosene) 86.31 रुपये प्रति लीटर
-लाइट डीजल 77.53 रुपये प्रति लीटर
इतना वसूला जा रहा है टैक्स
पाकिस्तान (pakistan) सभी पेट्रोलियम उत्पादों पर 17 फीसदी जीएसटी लगाता है। इसके अलावा पेट्रोल (Petrol) पर 14 रुपये, डीजल (diesel) पर 18 रुपये, केरोसिन (kerosene) पर 6 रुपये और लाइट डीजल पर 3 रुपये का टैक्स अतिरिक्त रूप से वसूला जाता है।
ईंधन महंगा होने से बढ़ी महंगाई
पाकिस्तान (Pakistan) में महंगाई (Inflation) की दर बढ़कर 10 फीसदी हो गई है। जनवरी 2019 में पाकिस्तान में कंज्यूमजर प्राइस इंडेक्स (CPI) की दर जहां 7.2 फीसदी थी, वहीं होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) की दर करीब 9.9 फीसदी पर थी। इस महंगाई (Inflation) के चलते और आतंकवाद के चलते ही पाकिस्तान (Pakistan) में विदेशी निवेश नहीं आ पा रहा है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। वहीं भारत में महंगाई (Inflation) की दर करीब 3 फीसदी के आसपास चल रही है, जो पाकिस्तान से काफी अच्छी है।
महंगाई से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था हो रही प्रभावित
भारत की सर्जिकल स्ट्राइक-2 (Surgical Strike 2) से जहां पाकिस्तान का रुपया कमजोर हुआ है, वहीं महंगाई भी बढ़ी है और इसका सीधा असर वहां की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। इससे पाकिस्तान (Pakistan) का ट्रेड डेफिसिट (Pakistan Trade Deficit) लगातार बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तानी ट्रेड डेफिसिट (Pakistan Trade Deficit) जहां वित्तीय वर्ष 2014 में 16.6 बिलियन डॉलर का था, वह वित्तीय वर्ष 2018 में बढ़कर 31.2 बिलियन डॉलर (dollar) का हो गया है। वित्तीय वर्ष 2014 में पाकिस्तान ने जहां केवल 24.8 बिलियन डॉलर का निर्यात किया था वहीं 56 बिलियन डॉलर का आयात किया था। जब किसी देश का आयात उसके निर्यात से ज्यादा हो जाता है तो उसे ट्रेड डेफिसिट कहा जाता है। चालू वित्तीय वर्ष में जाानकारों के अनुसार यह आंकड़ा और खराब होता जा रहा है।
देश चलाने के लिए लेना पड़ा रहा कर्ज
पाकिस्तान (Pakistan) पर कर्ज (debt on pakistan) का बोझ लगातार बढ़ता रहा है। पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2017 में पाकिस्तान की जीडीपी का 75.2 फीसदी कर्ज (debt on pakistan) था, जिसमें से 26.2 फीसदी हिस्सा विदेशी कर्ज का था। कर्ज की यह स्थिति सितंबर 2018 में और भी बिगड़ गई है। इस दौरान पाकिस्तान पर जीडीपी की तुलना में 80.3 फीसदी कर्ज (debt on pakistan) था, जिसमें विदेशी कर्ज की हिस्सेदारी 31.2 फीसदी थी। स्थित यह है कि पाकिस्तान की सरकार को अपने जरूरी कामकाज को चलान के लिए कर्ज लेना पड़ा रहा है। लेकिन जानकारों को आशंका है कि सर्जिकल स्ट्राइक-2 (Surgical Strike 2) के बाद उसे अब विदेश से कर्ज लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा, जिसके चलते उसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से कर्ज लेने के लिए उसकी कड़ी शर्तें माननी पड़ सकती हैं।
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