नई दिल्ली। भारत के उपभोक्ताओं दुनिया में सबसे ज्यादा आशावादी हैं। यह बात कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स (CCI) और नील्सन के सर्वे में सामने आई है। 2018 की चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के लिए 64 देशों के 32,000 उपभोक्ताओं पर यह ऑनलाइन सर्वे ऑनलाइन किया गया था। इस सर्वे में भारत 133 के स्कोर के साथ दुनिया में सबसे आगे रहा है। वहीं फिलीपींस 131 के स्कोर के साथ दूसरे और इंडोनेशिया (127) तीसरे नंबर पर रहा। वहीं सर्वे के हिसाब से दक्षिणी कोरिया के उपभोक्ता सबसे ज्यादा निराशावादी हैं। इसकी वजह है कि वहां के लोग बढ़ती महंगाई, वेतन में कम वृद्धि, स्टॉक मार्केट के कमजोर प्रदर्शन और बेरोजगारी की समस्या से डरे हुए हैं। ग्लोबल कंज्यूमर कॉन्फिडेंस में 49 स्कोर के साथ यह देश आखिरी नंबर पर है।

कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स (CCI) क्या है
नेल्सन की तरफ से 2005 से ही हर साल यह कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स (CCI) जारी किया जा रहा है। इस सर्वे से पता चलता है कि किसी देश के उपभोक्ताओं का सेंटिमेंट कैसा है। इसमें खर्च करने को लेकर उनमें कितना विश्वास यह पता चलता है। माना जाता है कि अगर अर्थव्यवस्था पर लोगों का विश्वास है तो वे खर्च करने में नहीं हिचकिचाएंगे, लेकिन विश्वास डगमगाने पर उपभोक्ता खर्च करने में हिचकिचाते हैं।
तीसरी तिमाही में भारत का स्कोर था 130
तीसरी तिमाही में भी भारत टॉप पर था। उस वक्त स्कोर 130 रहा था। तब फिलीपींस और इंडोनेशिया 126 के स्कोर के साथ संयुक्त रूप से चौथे नंबर पर थे।
कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स (CCI) 14 साल के उच्च स्तर पर
ग्लोबल कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स चौथी तिमाही में 1 प्वाइंट बढ़कर 107 पर पहुंच गया। यह 14 साल में सबसे ज्यादा है। कॉन्फ्रेंस बोर्ड कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स ने जिन पैमानों के आधार पर आकलन किया। उनमें- रोजगार की संभावनाओं के प्रति उपभोक्ताओं के विचार, उनकी व्यक्तिगत आय की स्थिति और अगले 12 महीने में खर्च की संभावनाएं शामिल थे।
मूडीज ने जताया विकास दर में तेजी का अनुमान
खर्च करने के लिए जरूरी है कि उपभोक्ता को आमदनी हो. इसके लिए जरूरी है कि रोजगार, वेतन में बढ़ोतरी और बाजार में निवेश का प्रवाह बरकरार रहे। अगर ये परिस्थितियां अनुकूल होंगी तो उपभोक्ता खर्च भी करते हैं और ये कारक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक माने जाते हैं। कुल मिलाकर अगर कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स (CCI) में अगर इजाफा हो रहा है तो मतलब साफ है कि अर्थव्यवस्था के संकेत सकारात्मक हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि नॉर्थ अमेरिका (जिसे यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका/USA)को छोड़कर विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों के उपभोक्ता अमूमन कम आशावादी होते हैं। यूरोपीय देशों का कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स (CCI) 90 से भी कम है। इसके मुकाबले एशियन देशों का कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स (CCI) इससे कहीं ज्यादा है।
एशिया प्रशांत में सुधार
कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स (CCI) से पता चलता है कि एशिया-प्रशांत में CCI तीन अंक बढ़कर 117 हो गया है। चीन, भारत, इंडोनेशिया और जापान जैसे प्रमुख बाजारों में सुधार हुआ है। हालांकि, एशिया-प्रशांत के लिए CCI आमतौर पर अच्छा है। मगर, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और हांगकांग जैसे अधिक परिपक्व अर्थव्यवस्था में लोग अपने खर्च के बारे में अधिक सतर्क हैं। इन देशों में कंज्यूमर बिजनेस के लिए अच्छे अवसर हैं।
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