अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमत में बढ़ोतरी से घरेलू बाजार में तीन माह बाद रसोई गैस के दामों में वृद्धि की गई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमत में बढ़ोतरी से घरेलू बाजार में तीन माह बाद रसोई गैस के दामों में वृद्धि की गई है।
जी हां बता दें कि आपका घरेलू एलपीजी सिलेंडर महंगा हो गया है। तेल कंपनियों ने रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी की है।
ये बढ़ोतरी सब्सिडी और बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर के लिए की गई है। कंपनियों की इस बढ़ोतरी के बाद घरेलू रसोई गैस का सब्सिडी वाला रसोई गैस सिलेंडर 2.08 रुपए और गैर-सब्सिडी वाला 42.50 रुपए महंगा हो गया है।

सिलेंडरों की कीमत में यह वृद्धि लगातार तीन महीने की कटौती के बाद की गई है। इंडियल ऑयल कॉरपोरेशन ने एक बयान में यह जानकारी दी। कंपनी का कहना है कि ईंधन के बढ़े हुए बाजार मूल्य पर कर प्रभाव के चलते यह बढ़ोत्तरी आवश्यक हो गई थी।
हर शहर में एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़े जायेंगे
इस बढ़ोत्तरी के बाद दिल्ली में 1 मार्च से 14.2 किलोग्राम के सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 495.61 रुपए होगी जो अभी 493.53 रुपए है। वहीं गैर-सब्सिडी वाला सिलेंडर अब 701.50 रुपए का होगा। तेल कंपनियों की इस बढ़ोतरी के बाद देश के हर शहर में एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ जाएंगे। हर शहर में ये दाम अलग-अलग हो सकते हैं।
कंपनियां एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हर महीने बदलाव करती हैं। इस पर महीने की आखिरी तारीख पर फैसला होता है। वहीं पेट्रोल और डीजल के दाम रोजाना तय किए जाते हैं। हालांकि कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर सब्सिडी वाले एलपीजी ग्राहकों पर ज्यादा नहीं पड़ेगा। जानकारों के मुताबिक ये बढो़तरी बहुत ही मामूली है। वहीं बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर लेने वालों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से महिलाओं को बहुत राहत
जैसा कि आप सब जानते हैं कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) से कमजोर वर्ग के परिवारों खासकर महिलाओं को बहुत राहत मिली है। इसे 1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया में लॉन्च किया गया था।
PMUY के तहत सरकार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को घरेलू रसोई गैस (एलपीजी (LPG) गैस) का कनेक्शन देती है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) केंद्र सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सहयोग से चलाई जा रही है।
ग्रामीण इलाके में खाना पकाने के लिए परंपरागत रूप से लकड़ी और गोबर के उपले का इस्तेमाल किया जाता है। इससे निकलने वाले धुएं का खराब असर महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसलिए प्रधानमंत्री उज्जवला योजना (PMUY) से ऐसी महिलाओं को राहत मिलती है। साथ ही इससे ग्रामीण इलाके को स्वच्छ रखने में मदद मिलती है।
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