इस्लामाबाद। दिवालिया होने की कगर पर खड़े पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक गवर्नर ने गुरुवार को दावा किया है कि मित्र देशों की 'मदद' की वजह से उनका देश वित्तीय संकट से बाहर आ चुका है। उनका दावा है कि अर्थव्यवस्था सही राह पर आगे बढ़ रही है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के गवर्नर तारिक बाजवा (State Bank of Pakistan Governor Tariq Bajwa) का यह बयान सऊदी अरब द्वारा पाकिस्तान की विभिन्न परियोजनाओं में 20 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा के बाद आया है। हालांकि बाजवा ने यह साफ नहीं किया है कि प्रधानंमत्री इमरान खान की सउदी अरब और चीन से 'मदद" मांगने के नाम पर मिले कर्ज के बाद भी उनको क्यों अंतरराष्ट्रीय मुद्रा क्यों जाना पड़ रहा है। वहीं सउदी अरब के प्रिंस क्राउन ने पाकिस्तान को इस दौरे पर किसी भी प्रकार की मदद नहीं दी है, केवल निवेश के समझौते किए हैं, जिनका पैसा आने में सालों लगता है। वहीं पाकिस्तान की फिलहाल स्थिति यह कि वह अपने 2 माह के आयात बिल भरने के काबिल नहीं है।

डॉन में छपी है खबर
अखबार डॉन में छपी खबर के अनुसार लाहौर में एक निजी विश्वविद्यालय के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बाजवा ने कहा कि अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता समाप्त हो गई है, जबकि सरकार सही राह पर आगे बढ़ रही है और वह सभी आर्थिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। गवर्नर ने चालू खाता घाटा के बारे में भी बात की, जिसने चालू वित्त वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था का भारी नुकसान पहुंचाया है। बाजवा ने कहा कि चालू खाता घाटे को खत्म करने के लिए एक योजना तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि घाटा देश के लिए बहुत बड़ी बाधा है और सरकार इसे कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से राहत पैकेज पाने के लिए अभी भी बातचीत कर रही है।
मदद के नाम मिला है पाक को कर्ज
प्रधानमंत्री इमरान खान की नई सरकार के समक्ष चालू खाता घाटा ही सबसे बड़ी चिंता का विषय है। खान ने बाहरी घाटे को कम करने के लिए वित्तीय मदद हासिल करने और निवेश पाने के लिए चीन, सउदी अरब, यूएई, मलेशिया और तुर्की जैसे मित्र देशों की यात्रा की। जिसमें से केवल सउदी अरब औ चीन ने ही कुछ कर्ज देना स्वीकार किया है।
सउदी अरब हरदम देता रहा है मदद
वैसे सउदी अरब से पाकिस्तान हरदम आर्थिक मदद देता रहा है। पाकिस्तानी मदरसों को सददी से काफी पैसा मिलता है। पाकिस्तान ने 1998 में परमाणु परीक्षण के वक्त भी सददी अरब ने ही दुनिया के आर्थिक प्रतिबंधों के असर से बचाया था। 2014 में पाकिस्तानी रुपया जब बुरी तरह से टूटा तब भी सऊदी ने इस्लामाबाद को डेढ़ अरब डॉलर की मदद दी।
पाकिस्तान की ताजा आर्थिक स्थिति
पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा महज 8 अरब डॉलर बची है। पिछले साल अगस्त महीने में जब इमरान खान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली तब से पाकिस्तान अपने को डिफॉल्टर होने से बचाने की कोशिश कर रहा है। वहीं पाकिस्तान फिलहाल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मदद लेने की कोशिश कर रहा है। 1980 के दशक के बाद से पाकिस्तान आईएमएफ की शरण में 13 बार जा चुका है।
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