नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने अमेरिका से हर साल 30 लाख टन कच्चा तेल खरीदने का करार कर लिया है। इस कच्चे तेल की आपूर्ति इसी साल 1 अप्रैल से शुरू हो जाएगी। आईओसी (IOC) इस करार पर करीब 1.5 अरब डॉलर हर साल खर्च करेगी। भारत में इस डील की घोषणा उस समय हुई है जब सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (saudi prince Mohammad Bin Salman Al Saud) पाकिस्तान के साथ अरबों डॉलर की डील कर रहे थे। क्राउन प्रिंस मंगलवार को भारत आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की सरकार के इस फैसले से कच्चे तेल के लिए अरब देशों से निर्भरता कम होगी।

समझौता 15 को घोषणा 18 फरवरी को
आईओसी (IOC) के अनुसार हमने अलग-अलग देशों से क्रूड ऑइल खरीदने की नीति के तहत अमेरिका के साथ 30 लाख टन क्रूड ऑइल खरीदने का समझौता किया है। यह कॉन्ट्रैक्ट 15 फरवरी को फाइनल हुआ। इससे पहले आईओसी (IOC) ने कच्चा तेल खरीदने के लिए अमेरिका के साथ पिछले साल अगस्त में टर्म-टेंडर डील साइन की थी। उस समय नवंबर 2018 से जनवरी 2019 के बीच डिलीवरी के वादे के साथ कंपनी ने 60 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदने का समझौता किया था।
करार के डिटेल
आईओसी (IOC) के अनुसार 30 लाख टन क्रूड ऑयल खरीदने पर करीब 1.5 अरब डॉलर की लागत आएगी। आईओसी (IOC) से पहले दूसरी सरकारी रिफाइनरी कंपनियां अमेरिका से स्पॉट मार्केट के जरिये कच्चे तेल की खरीदारी कर रही थीं। यह खरीदारी टेंडर बेसिस पर होती थी। कंपनियां बोर्ड की अनुमति के बगैर खास अवधि या मात्रा में तेल खरीदने का समझौता नहीं कर सकतीं।
तोड़ी परंपरा
आईओसी (IOC) और बीपीसीएल-एचपीसीएल जैसी कंपनियां पश्चिम एशिया की तेल कंपनियों के साथ ही तेल खरीदने के लिए सालाना करार करती थीं। लेकिन इस परंपरा को तोड़ते हुए आईओसी (IOC) ने अमेरिका से एक कार्गो क्रूड ऑइल के लिए टेंडर दिया था। कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि अब बोर्ड ने सालाना करार के आधार पर अमेरिका से तेल खरीदने की इजाजत दे दी है।
ईरान भी है कारण
ईरान पर अमेरिका के फिर से आर्थिक पाबंदी लगाने के कुछ महीनों के अंदर भारत ने अमेरिका से तेल की खरीदारी बढ़ाई है। ईरान, भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर है। ईरान पर अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध 4 नवंबर 2018 से लागू हुआ, जिसके बाद भारत ने उससे तेल की खरीदारी घटाई है।
अरब देशों पर निर्भरता होगी कम
इंडियन ऑयल अपनी तेल जरूरतों का अधिकांश तेल लॉन्ग टर्म डील के माध्यम से खरीदता है, जो ज्यादातर ओपेक (OPEC) देशों के साथ होती हैं। ओपेक के सदस्यों में अधिकांश अरब देश शामिल हैं। इस डील से आईओसी को ओपेक देशों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
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