प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का चुनावी साल में आया बजट सही मायनों में चुनावी उम्मीदों पर खरा उतरता है। देखा जाये तो इसमें देश के अन्नदाता से लेकर देश के करदाता तक दोनों का ख्याल रखा गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का चुनावी साल में आया बजट सही मायनों में चुनावी उम्मीदों पर खरा उतरता है। देखा जाये तो इसमें देश के अन्नदाता से लेकर देश के करदाता तक दोनों का ख्याल रखा गया है। किसानों को कैश ट्रांसफर, मिडिल क्लास को कर छूट और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को पेंशन का एलान चुनाव में मोदी के पक्ष में खड़ा हो सकता है।
या यूं कहें कुल मिलाकर, सरकार ने एक झटके में करीब 25 करोड़ लोगों की चुनावी उम्मीदों को पूरा करने का प्रयास किया है।हालांकि, सरकार को अर्थव्यवस्था की सेहत के नजरिए से चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। सरकार वित्त वर्ष 2019-20 में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से चूक सकती है।
माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने हाल में हुए विधानसभा चुनावों में, खासकर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मिली शिकस्त को एक सबक के रूप में लिया। यही वजह है कि शायद मोदी सरकार को बजट में दो हेक्टेयर तक की जोत वाले किसानों को 6,000 रुपये सालाना कैश सपोर्ट और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए 3000 रुपये प्रति माह पेंशन का एलान करना पड़ा।
मजदूरों के लिये तीन हजार रुपये की पेंशन
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना तथा असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिये तीन हजार रुपये की पेंशन देने के लिए प्रधानमंत्री श्रम-योगी मानधन वृहद पेंशन योजना शुरू करने का प्रस्ताव किया गया है।
किसानों को सालभर में दो- दो हजार रुपये की तीन किस्तों में कुल 6,000 रुपये उनके खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे। इसके लिए अगले वित्त वर्ष में 75,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। गोयल ने कहा, यह योजना इसी वित्त वर्ष से लागू हो जाएगी और इसके लिए 20,000 करोड़ रुपये को प्रावधान किया गया है।
करीब 3 करोड़ नौकरीपेशा लोगों को लाभ
केंद्र सरकार ने अंतरिम बजट में नौकरीपेशा लोगों को सबसे बड़ी राहत दी है। सरकार ने पांच लाख रुपए तक की कर योग्य आय को इनकम टैक्स से छूट दे दी है। सरकार का कहना है कि इस कर छूट का लाभ करीब 3 करोड़ नौकरीपेशा लोगों को मिलेगा।
अधिक कर छूट से इन लोगों को पास खर्च करने के लिए ज्यादा धन होगा। सरकार ने 5 लाख के अतिरिक्त डेढ़ लाख तक के निवेश को भी करमुक्त कर दिया है। इससे नौकरीपेशा लोग ज्यादा निवेश कर ज्यादा कमाई कर सकते हैं
महिलाओं के हित में फैसला
40,000 रुपए तक ब्याज पर पोस्टऑफिस या बैंक टीडीएस नहीं ले सकेंगे। वहीं उज्ज्वला योजना के तहत दो करोड़ निशुल्क रसोई गैस कनेक्शन महिलाओं को दिए जाएंगे। वहीं 174 करोड़ ज्यादा खर्च किए जाएंगे।
महिला सुरक्षा व सशक्तीकरण पर सरकारी उपक्रम महिलाओं द्वारा संचालित लघु एवं मध्यम उद्यमों से सामग्री की खरीद करेंगे। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की 70 फीसदी लाभार्थी महिलाएं हैं, जिन्हें व्यवसाय के लिए कम दर पर ऋण दिए जा रहे हैं। वहीं आंगनबाड़ी और आशा योजना के तहत सभी श्रेणियों के कार्मिकों के मानदेय में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
स्कूली शिक्षा बजट 56,386.63 करोड़ रुपये का आवंटन
पिछले साल शिक्षा के लिए 85,010 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था, वह इस साल 93.84 हजार करोड़ हो गया है। स्कूली शिक्षा बजट को इस साल 56,386.63 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले साल 50 हजार करोड़ रुपये था।
स्कूली शिक्षा बजट का आधा से अधिक हिस्सा यानी 36,322 करोड़ रुपये समग्र शिक्षा अभियान के लिए रखा गया है। यह योजना पिछले साल सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, शिक्षक शिक्षण एवं वयस्क शिक्षा कार्यक्रम को मिलाकर बनाई गई थी। वहीं, स्कूल में बच्चों को नि:शुल्क भोजन मुहैया कराने वाली ‘मिड डे मील' योजना के लिए बजट में 11 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
पिछले साल इस योजना के लिए 10,500 करोड़ दिए गए थे। केंद्रीय विद्यालय संगठन को इस साल 4862 करोड़ रुपये दिए गए हैं। पिछले साल बजट में इसके लिए 4425 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। हालांकि, संशोधित बजट में इसे बढ़ाकर 5006.75 करोड़ रुपये कर दिया गया था।
उच्च शिक्षा के लिए 37,461.01 करोड़ रुपये दिए
उच्च शिक्षा के लिए वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने 37,461.01 करोड़ रुपये दिए हैं। पिछले साल उच्च शिक्षा के लिए 35,010 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। इसमें से 6143.02 करोड़ रुपये भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटीज) के लिए आवंटित किए गए हैं।
पिछले साल आईआईटी के लिए 5613.00 करोड़ रुपये का बजट था। केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए 6604.46 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। यह पिछले साल के 6445.23 करोड़ रुपये के बजट से मामूली बढ़ोतरी है।


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