नई दिल्ली। वीडियोकोन लोन घोटाले में आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर पर शिकंजा कसता जा रहा है। इस मामले की जांच के लिए बनाई श्रीकृष्ण कमेटी ने उन्हें दोषी माना है। कमेटी की इस रिपोर्ट के बाद आईसीआईसीआई बैंक के बोर्ड ने तय किया है कि उनको बैंक की सेवा से टर्मिनेट माना जाएगा और 2009 से उनको मिले सभी बोनस वसूले जाएंगे। इसलिए उनके सभी मौजूदा भविष्य के फायदे नहीं मिलेंगे।

ये है मामला
2012 की शुरुआत में वीडियोकॉन ग्रुप को आईसीआईसीआई बैंक से 3,250 करोड़ रुपये का लोन मिला। उस समय चंदा कोचर आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ थीं। आरोपों के मुताबिक, वीडियोकॉन ग्रुप को लोन मिलने के बाद शेयरों के ट्रांसफर के जरिए चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को फायदा पहुंचाया गया था। आईसीआईसीआई बैंक से वीडियोकॉन को मिले लोन में मामले में चंदा कोचर पर हितों के टकराव को लेकर सवाल उठने लगे। विवाद के बाद चंदा ने 4 अक्टूबर, 2018 को आईसीआईसीआई बैंक के सीईओ और एमडी पद से इस्तीफा दे दिया था।
जांच कर रहे सीबीआई अफसर को हटाया गया
अभी कुछ ही दिन पहले आईआईसीआई बैंक फ्रॉड केस की जांच करनेवाले सीबीआई के एसपी सुधांशु धर मिश्रा का तबादला कर दिया गया था। उन पर सीबीआई की छापे मारी की सूचना लीक कारने का आरोप था। हालांकि सीबीआई ने इसके बाद कहा था कि यह एक सामान्य तबादला है और 20 अन्य अधिकारियों का भी तबादला किया गया है।


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