आयकर विभाग ने एंटी-बेनामी लेनदेन कानून के तहत अपनी कार्रवाई में अब तक 6,900 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है।
आयकर विभाग ने एंटी-बेनामी लेनदेन कानून के तहत अपनी कार्रवाई में अब तक 6,900 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है।
इस बात की जानकारी एजेंसी ने मंगलवार को इस बारे में प्रमुख अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित किया है। इसमें कहा गया है कि जो लोग बेनामी सौदे करते हैं, बेनामीदार (जिसके नाम पर बेनामी संपत्ति है) तथा लाभार्थी (जो इसके लिए पैसा देते हैं) पर अभियोजन चलाया जा सकता है और उन्हें सात साल तक की सजा हो सकती है।

नए कानून के तहत सजा की अवधि बढ़ा दी गयी
बता दें कि बेनामी संपत्तियों और लेनदेन पर रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बेनामी लेनदेन कानून में 2016 में संसोधन किया था। इस संशोधन में बेनामी संपत्ति को सील करने और उसे जब्त करने का अधिकार जोड़ा गया है। नए कानून के तहत बेनामी संपत्ति पाए जाने पर सजा की अवधि को तीन साल से बढ़ाकर सात साल और बेनामी संपत्ति के बाजार मूल्य के 25 फीसदी के बराबर जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
गलत सूचना देने पर पांच साल की जेल
आपको इस बात से अवगत करा दें कि विज्ञापन में आयकर विभाग ने लोगों से गलत सूचना नहीं देने को कहा है। विभाग ने कहा है कि बेनामी संपत्ति लेनदेन कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति गलत सूचना देने का आरोपी पाया जाता है। तो उस पांच साल की जेल या बेनामी संपत्ति के बाजार मूल्य के 10 फीसदी के बराबर जुर्माना या दोनों का दंड लगाया जा सकता है। विभाग ने सरकार की सहायता हेतु सभी लोगों से ईमानदारी से सही सूचना देने की अपील की है।
ये होती है बेनामी संपत्ति
आपको बता दे कि जब कोई चल या अचल संपत्ति किसी बेनाम व्यक्ति को ट्रांसफर कर दी जाती है लेकिन उसका असली लाभ ट्रांसफर करने वाले को ही मिलता है तो वह बेनामी संपत्ति कहलाती है। बेनामी संपत्ति लेनदेन कानून 2016 के तहत ऐसा करना गैर कानूनी है और ऐसा करने पर दोषी व्यक्ति को जेल और जुर्माना दोनों का दंड देने का प्रावधान है।


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