नई दिल्ली। इनकम टैक्स विभाग (income tax) को इंफ्रास्ट्रक्चर एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (IL&FS) की ग्रुप की कंपनी IL&FS रेल लिमिटेड की जांच में कई गड़बड़ियां मिली हैं। एक जानकारी के अनुसार IL&FS ट्रांसर्पोटेशन नेटवर्क की इस सब्सिडियरी कंपनी की बुक्स में कथित रूप से शेल कंपनियों से जुड़ी कई इंट्री मिली हैं। ये ऐसे खर्च की इंट्री की हैं जिनसे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के काम वास्तव में हुए ही नहीं हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट अनुसार इनकम टैक्स विभाग (income tax) को जांच में मिला है जिसमें IL&FS रेल लिमिटेड ने कथित रूप से शेल कंपनियों को कई सारे ठेके दिए हैं, जिनका काम वास्तव में हुआ ही नहीं है। इससे कंपनी को आर्थिक नुकसान भी हुआ। हालांकि इंडियन एक्सप्रेस ने इंफ्रास्ट्रक्चर एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (IL&FS) के प्रवक्ता से इस संबंध पक्ष जानने का प्रयास किया तो उन्होंने कमेंट करने से मना कर दिया।
इनकम टैक्स विभाग (income tax) के अनुसार वित्तीय वर्ष 2013-14 में IL&FS रेल लिमिटेड को कोलकाता की एक कंपनी सिल्वरप्वाइंट इंफ्राटेक लिमिटेड से 20.18 करोड़ रुपये के बोगस बिल मिले। ऐसा ही एक मामला 251 करोड़ रुपये की इंट्री का भी है। इनकम टैक्स विभाग के अनुसार जांच में मिला है कि सिल्वरप्वाइंट इंफ्राटेक लिमिटेड के पास न तो ऐसे काम पूरे के करने के लिए कंपनी में मैनपॉवर था और न ही इंफ्रास्ट्रैक्चर था, जिससे वह मिले हुए ठेके को पूरा कर सके। इसी के चलते इनकम टैक्स विभाग ने IL&FS रेल लिमिटेड के इस खर्च को मानने से इनकार कर दिया है, हालांकि IL&FS रेल लिमिटेड ने इनकम टैक्स विभाग के इस फैसले के खिलाफ अपील करी है।
इसी तरह के अन्य मामले भी इनकम टैक्स विभाग (income tax) को मिले हैं। इनमें करीब 20 करोड़ रुपये के काम तीन कंपनियों सूर्यमुखी प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, दिव्यांशी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड और एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को दिए गए। इनकम टैक्स विभाग का मानना है कि इन कंपनियों ने केवल बिल ही दिए हैं। इनकम टैक्स विभाग के अनुसार इन में सूर्यमुखी प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, दिव्यांशी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वीकार किया है उनकी कंपनी ने केवल बिल ही जारी किए हैं।
क्या होती है शेल कंपनियां
शेल कंपनियां कागजों पर बनी ऐसी कंपनियां होती हैं जो किसी तरह का आधिकारिक कारोबार नहीं करती हैं। इन कंपनियों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता है। इन कंपनियों के संचालन की बात की जाए तो इनमें किसी तरह का कोई काम नहीं होता, इनमें केवल कागजों पर एंट्रीज दर्ज की जाती हैं। हालांकि, कंपनीज एक्ट में शेल कंपनी शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है।
क्या करती हैं ये कंपनियां
आमतौर पर ये कंपनियां एक मीडियम के माध्यम से ब्लैक मनी को व्हाइट करने का काम करती हैं। इनका इस्तेमाल ब्लैकमनी को कम से कम खर्च में वाइट बनाने में किया जाता है। इन कंपनियों में टैक्स को पूरी तरह से बचाने या कम से कम रखने की व्यवस्था होती है। इसमें पूरे पैसे को एक्सपेंस के तौर पर दिखाया जाता है, जिससे टैक्स भी नहीं लगता है।
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