गुड्स और सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन में आई गिरावट से चिंतित टैक्स अधिकारी कारोबारियों द्वारा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अधिक लाभ उठाने वाले मामलों की जांच शुरू कर सकते हैं।
गुड्स और सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन में आई गिरावट से चिंतित टैक्स अधिकारी कारोबारियों द्वारा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अधिक लाभ उठाने वाले मामलों की जांच शुरू कर सकते हैं। बड़ी संख्या में राज्यों में GST कलेक्शन में गिरावट के कारणों की जांच के लिए GST परिषद ने एक मंत्री-समूह का गठन किया है। इस समूह की बैठक में ITC के अधिक उपयोग का मुद्दा उठाया गया।

कुछ कारोबारियों द्वारा नकली बिल से ज्यादा क्रेडिट लेने की संभावना सूत्रों के अनुसार, आदर्श स्थिति में इनपुट टैक्स क्रेडिट से राजस्व का नुकसान नहीं होना चाहिए लेकिन इस बात की संभावना है कि कुछ कारोबारी इस प्रावधान का दुरुपयोग कर रहे हों।
टैक्स क्रेडिट का दावा करने के लिए वह नकली बिल बना रहे हों। मंत्री समूह की बैठक के दौरान यह बात रखी गई कि कुल GST देनदारी में से 80 फीसदी का निपटान इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिए होता है। मात्र 20 फीसदी टैक्स ही नकद रूप से जमा कराया जाता है। चालू वित्त वर्ष में GST का औसत मासिक कलेक्शन 96,000 करोड़ रुपये रहा है।
संभावना है कि कुछ दावे नकली बिलों के आधार पर किए जा रहे
हालांकि मौजूदा व्यवस्था में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। जिसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट दावों का आपूर्तिकर्ताओं द्वारा पहले चुकाए गए इनपुट कर से तत्काल सीधे मिलान किया जा सके। अभी यह मिलान GST का दावा हासिल कर लिए जाने के बाद जीएसटी नेटवर्क द्वारा जनित GSTR-2A के आधार पर किया जाता है। मिलान में घट-बढ़ निकलने के बाद टैक्स अधिकारी कारोबार को नोटिस भेजते हैं।
सूत्रों ने बताया कि अभी की व्यवस्था में इनपुट टैक्स क्रेडिट दावा दाखिल करने और उनका मिलान करने में काफी समय का अंतर है, ऐसे में संभावना है कि कुछ दावे नकली बिलों के आधार पर किए जा रहे हों। नई रिटर्न प्रणाली आ जाने से अधिकारियों के पास वास्तविक समय में दावों का मिलान करने की सुविधा मिलेगी।
FY 19 कितना कलेक्शन किस माह में
इस बात की जानकारी दें कि राजस्व विभाग अब आईटीसी के दावों की अधिक संख्या में जांच करेगा। ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि दावे उचित हैं या फर्जी। इस वित्त वर्ष के दौरान जीएसटी संग्रह अप्रैल में 1.03 लाख करोड़ रुपये मई में 94,016 लाख करोड़ रुपए, जून में 95,610 करोड़ रुपए ,जुलाई में 96,483 करोड़ रुपये ,अगस्त में 93,960 करोड़ रुपये , सितंबर में 94,442 करोड़ रुपए, अक्तूबर 1,00,710 करोड़ रुपए, नवंबर में 97,637 करोड़ रुपये तथा दिसंबर में 94,726 करोड़ रुपए रहा।
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