नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी बजट 2019 के बाद अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी को बड़ा तोहफा दे सकते हैं। उम्मीद है कि पीएम मोदी स्वदेश-निर्मित ट्रेन-18 (train 18) दिल्ली से वाराणसी के लिए रवाना कर सकते हैं। रेलवे अधिकारियों ने जानकारी दी है उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय से इसके लिए संपर्क किया है और पीएम नरेंद्र मोदी का समय मांगा है। हालांकि इस ट्रेन का किराया शताब्दी ट्रेनों से 40 से 50 फीसद तक ज्यादा रह सकता है।

स्वदेश-निर्मित ट्रेन-18 के परीक्षण पूरे
सभी सुरक्षा क्लीयरेंस, परीक्षण और जांच के बाद रेलवे ने इस स्वदेश-निर्मित ट्रेन-18 (train 18) को चलाने का फैसला लिया है। रेलवे के एक अधिकारी के अनुसार ट्रेन के संचालन की सभी मंजूरियां मिलने के बाद उन लोगों ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से संपर्क कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों लांच कराने के लिए समय मांगा है।
जानें कितना रह सकता है किराया
हालांकि ट्रेन 18 (train 18) के किराए की घोषणा तो रेलवे बाद में करेगा, लेकिन चर्चा है कि इस ट्रेन के एग्जिक्यूटिव क्लास का किराया 2,800 रुपये से 2,900 रुपये के बीच और चेयर कार का किराया 1,600 रुपये से 1,700 रुपये के बीच रह सकता है। यह किराया शताब्दी से ज्यादा होगा। हालांकि माना जा रहा है कि इस ट्रेन 18 (train 18) में मिलने वाली सुविधाओं के हिसाब से यह किराया लोगों को ज्यादा नहीं लगेगा।
बजट बाद चलने की उम्मीद
अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री बजट पेश होने के बाद ट्रेन 18 (train 18) के परिचालन का शुभारंभ कर सकते हैं। पहली ट्रेन 18 (train 18) नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चलेगी। मालूम हो कि वाराणसी मोदी का संसदीय निर्वाचन क्षेत्र है। अधिकारियों ने बताया कि इंजन रहित ट्रेन 18 (train 18) को सरकार के इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर की अंतिम मंजूरी गुरुवार को मिल गई है। उन्होंने कहा कि हमने नई दिल्ली-वाराणसी मार्ग पर ट्रेन के परिचालन के उद्घाटन के लिए पीएमओ से समय मांगा है।
पीयूष गोयल पहले ही कर चुके हैं इस बात की घोषणा
इसी महीने रेलमंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि ट्रेन 18 (train 18) नई दिल्ली और वाराणसी के बीच चलेगी। यह ट्रेन 755 किलोमीटर की दूरी आठ घंटे में तय करेगी। इस रूट पर ट्रेन का ठहराव कानपुर और प्रयागराज में होगा। वर्तमान में सबसे तीव्रगामी ट्रेन को इस दूरी को तय करने में साढ़े ग्यारह घंटे का समय लगता है।
IFC में हुआ है इसका निर्माण
ट्रेन 18 (train 18) का निर्माण चेन्नई स्थित इंटिग्रल कोच फैक्टरी (आईसीएफ) में किया गया है। इसका परिचालन परीक्षण रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (RDSO), लखनऊ की देखरेख में किया गया है। परीक्षण के दौरान ट्रेन 180 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से कुछ ज्यादा पर चलने में सफल रही है। हालांकि यह ट्रेन अधिकतम 200 किलोमीटर की रफ्तार से चलने में सक्षम है। अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन 18 (train 18) मेट्रो ट्रेन की तरह इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर चलती है और यह अगले साल से शताब्दी एक्सप्रेस की जगह लेना शुरू कर देगी।


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