नई दिल्ली। बजट 2019 (Budget 2019) शिक्षा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक हो सकता है। अगर जानकारों की बात मानी जाए देश में पहली बार शिक्षा क्षेत्र का बजट 1 लाख करोड़ रुपये के पार निकल सकता है। वर्ष 2018-19 के बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए 85 हजार 10 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। इसमें से 50 हजार करोड़ रुपये स्कूली शिक्षा के लिए, जबकि 35,010 करोड़ रुपये उच्च शिक्षा के क्षेत्र के लिए आवंटित किया गया था। वैसे भी सरकार ने 10 फीसदी सवर्ण आरक्षण लागू करने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में सीटें बढ़ाने का ऐलान किया हुआ है।

ये है कारण
जानकारों के मुताबिक, वर्ष 2006 में केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण लागू करने से पड़े आर्थिक भार को वहन करने के लिए केंद्र सरकार ने सात हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। ऐसे में वर्तमान मूल्य पर सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में 25 फीसदी सीट बढ़ाने से 10 से 15 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। ये खर्च केंद्र सरकार को वहन करना होगा। यदि सरकार इसे तीन चरणों में भी लागू करती है, तो उसे इस सात-आठ हजार करोड़ रुपये इस मद में आवंटित करने होंगे। इसलिए उम्मीद है कि बजट 2019 (Budget 2019) में इस मद में आवंटन बढ़ सकता है।
पड़ेगा अतिरिक्त भार
वहीं मानव संसाधन विकास मंत्रालय अगले महीने से केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए 7वें वेतनमान के अनुरूप भत्ते देने की योजना बना रहा है। इससे भी दो हजार करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त भार पड़ेगा। इतना ही नहीं, इस साल से मंत्रालय को केंद्रीय शिक्षा संस्थानों द्वारा उच्च शिक्षा वित्तीय एजेंसी (हीफा) से लिए गए कर्ज की किस्तें भी चुकानी पड़ सकती हैं। इस तरह यह स्पष्ट है कि सरकार इस बार अब तक का सबसे बड़ा शिक्षा बजट लाने की तैयारी में है, लेकिन इसमें किसी नई बड़ी योजना की घोषणा की संभावना नहीं हैं। इसीलिए जानकारों को उम्मीद है कि बजट 2019 (Budget 2019) में राशि का आवंटन बढ़ सकता है।
1 फरवरी को पेश होगा बजट
इस बार अंतरिम बजट 2019 (Budget 2019) 1 फरवरी को पेश होने वाला है। यह बजट वित्त मंत्री का प्रभार संभाल रहे रेल मंत्री पीयूष गोयल सदन के पटल पर रख सकते हैं। दरअसल, अरुण जेटली विदेश में अपनी बीमारी का इलाज करा रहे हैं।


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