Jio को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में ये कंपनी, जुटा रही 25 हजार करोड़ रुपये

नई दिल्ली। रिलायंस जियो (Reliance Jio) से मिल रही कड़ी टक्कर को देखते हुए वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (vodafone idea limited) कंपनी ने कमर कस ली है। इसके तहत वोडाफोन-आइडिया राइट इश्यू के माध्यम से 25 हजार करोड़ रुपये जुटाने जा रही हैं। वोडाफोन-आइडिया कंपनी के बोर्ड ने राइट इश्यु के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस प्लान के अनुसार वोडाफोन इंडिया में वोडाफोन पीएलसी 11,000 करोड़ रुपये डालेगी। वहीं आदित्य बिड़ला ग्रुप की योजना 7,250 करोड़ रुपये इसमें डालने की है। बाकी पैसा अन्य तरीकों से जुटाया जाएगा।

Price war in telecom sector

स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी
कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को बताया है कि वोडाफोन आइडिया बोर्ड ने कंपनी के फुली पेड अप और/या पार्शियली पेड अप इक्विटी शेयरों और/या इक्विटी शेयरों में कन्वर्ट की जा सकने वाली दूसरी सिक्योरिटीज के इश्यू को मंजूरी दे दी है। इसमें अनिवार्य रूप से कन्वर्टिबल डिबेंचर शामिल भी होंगे। यह राइट्स इश्यू 25000 करोड़ रुपये का होगा।

रिलायंस जियो के चलते बढ़ी प्रतिस्पर्धा
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने जियो इन्फोकॉम के जरिए टेलीकॉम बिजनेस में कदम रखा है। यह कंपनी में फ्री मोबाइल सेवा दे रही थी और बाद में इसने सस्ती दरों पर 4जी डेटा देकर अन्य कंपनियों की राह मुश्किल कर रहा है। जियो की शुरुआत के बाद भारतीय टेलीकॉम मार्केट में एकीकरण की शुरुआत हुई और वोडाफोन एवं आइडिया ने विलय का रास्ता चुना।

जरूरतों को पूरा करने के लिए जुटाया जा रहा पैसा
सब्सक्राइबर्स की संख्या के लिहाज से देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया लिमिटेड है। कंपनी ने कहा है कि वह इक्विटी के जरिए 25000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है ताकि बैलेंस शीट मजबूत की जा सके और भविष्य में होने वाले कैपिटल एक्सपेंडिचर का इंतजाम हो सके। वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर के विलय से बनी वीआईएल में ब्रिटेन के वोडाफोन ग्रुप के पास 45.2 प्रतिशत हिस्सा है। वहीं आइडिया सेल्युलर के प्रमोटर आदित्य बिड़ला ग्रुप के पास 26 प्रतिशत हिस्सा है।

घट रही आमदनी
वीआईएल का रेवेन्यू मार्केट शेयर सितंबर तिमाही में सालभर पहले की इसी तिमाही से 32.8 प्रतिशत कम हो गया था, वहीं देश के हर हिस्से में इसकी आमदनी कम हुई थी। सितंबर से नवंबर 2018 के बीच कंपनी के हाथ से 2.05 करोड़ से ज्यादा कस्टमर निकल गए, हालांकि इसकी एक वजह वे मिनिमम रिचार्ज प्लान भी थे, जिन्हें कंपनी ने नॉन-रेवेन्यू जेनरेटिंग कस्टमर्स को दफा करने के लिए पेश किया था। कंपनी इस कदम के जरिए ऐवरेज रेवेन्यू पर यूजर बढ़ाना चाहती थी।

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