पेंशभोगियों ने अपनी जरुरतों को देखते हुए मोदी सरकार के सामने रखी अपनी बात।
पेंशभोगियों ने अपनी जरुरतों को देखते हुए मोदी सरकार के सामने रखी अपनी बात। पेंशभोगियों के एक मंच ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों को आरक्षण के प्रावधानों के मद्देनजर सालाना आठ लाख रुपये तक की व्यक्तिगत आय को आयकर से छूट दिये जाने की मांग की है।

भारतीय पेंशनर्स मंच का तर्क है कि सामान्य वर्ग के आरक्षण में सालना आठ लाख रुपये तक की आय वालों को आर्थिक रूप से कमजोर मान कर उन्हें आरक्षण के अवसर का पात्र माना गया है। इसलिए आयकर छूट की सीमा भी वर्तमान 2.5 लाख से बढ़ा कर आठ लाख रुपये की जानी चाहिए।
संगठन के महामंत्री वीएस यादव ने शनिवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि वर्तमान सरकार ने सवर्णों को दिये 10 फीसदी आरक्षण के लिए आठ लाख रुपये सालाना की आय वालों को गरीब माना है। इसलिए अब सरकार को आठ लाख रुपये तक की आय वालों से आयकर वसूलना भी बंद करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस बार के बजट में आयकर छूट सीमा को ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर आठ लाख रुपये किया जाना चाहिए। तभी सभी को न्याय मिल सकेगा।
संगठन का कहना हैं कि अपने सभी पेंशनभोगी सदस्यों की ओर से उसने अपनी मांगों को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली को एक ज्ञापन भी भेजा है। और तो वह अपनी अपनी मांगों पर टिके है। वित्त मंत्री अरुण जेटली आगामी पहली फरवरी को 2019-2020 का बजट पेश करेंगे। बता दें कि यह बजट अंमरिम बजट होगा।
फिलहाल, 2.5 लाख रुपये सालाना से कम की आय पर 0 फीसदी, 2.5 लाख रुपये से 5 लाख रुपये सालाना की आय पर आयकर की दर पांच फीसदी है। इसके अलावा, 5 से 10 लाख रुपये की आय पर कर की दर 20 फीसदी और उससे ऊपर की आय पर 30 फीसदी की दर से कर लगाया जाता है।


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