विभिन्न केंद्रीय श्रमिक संगठनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का बुधवार को दूसरा दिन है। देश के कुछ हिस्सों में सामान्य जनजीवन पर इसका असर देखने को मिला।
विभिन्न केंद्रीय श्रमिक संगठनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का बुधवार को दूसरा दिन है। देश के कुछ हिस्सों में सामान्य जनजीवन पर इसका असर देखने को मिला।
ये संगठन सरकार पर श्रमिकों के प्रतिकूल नीतियां अपनाने तथा एकतरफा श्रम सुधार करने का आरोप लगा रहे हैं। खबरों के अनुसार, कुछ राज्यों में सड़क परिवहन तथा बैंकिंग सेवाएं दूसरे दिन भी प्रभावित हुईं।

इस हड़ताल को 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों का समर्थन है। इनमें एटक, इंटक, एचएमएस, सीटू, एआईटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी शामिल हैं।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी मजदूर यूनियन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) इस हड़ताल में शामिल नहीं है।
इन संगठनों ने हड़ताल के दूसरे दिन बुधवार को राजधानी में मंडी हाउस से संसद की ओर विरोध रैली निकालने की घोषणा की है। इतना ही नहीं उनका कहना है कि देश में अन्य स्थानों में भी जुलूस निकाले जाएंगे।
हड़ताली संगठनों का आरोप है कि सरकार ने श्रमिकों के मुद्दों पर उसकी 12 सूत्री मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया है। वहीं उनका यह भी कहना है कि श्रम मामलों पर वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में गठित मंत्रियों के समूह ने दो सितंबर 2015 के बाद यूनियनों को वार्ता के लिए एक बार भी नहीं बुलाया है।
ये यूनियनें श्रम संघ कानून 1926 में प्रस्तावित संशोधनों का भी विरोध कर रही हैं। वहीं इन संशोधनों के बाद यूनियनें स्वतंत्र तरीके से काम नहीं कर सकेंगी। हड़ताल में शामिल ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) की महासचिव अमरजीत कौर ने पीटीआई भाषा से कहा कि गोवा और बिहार में पूरी तरह से बंद रहेगा तथा देश के कुछ अन्य हिस्सों में भी 100 प्रतिशत हड़ताल रहेगी।
उन्होंने कहा कि यूजीसी परीक्षा के कारण कुछ राज्यों के परिवहन विभाग हड़ताल में शामिल नहीं होंगे। इन श्रमिक संगठनों की हड़ताल को पहले दिन यानी मंगलवार को देश में मिश्रित प्रतिक्रिया मिली थी।शैक्षणिक संस्थानों, रेल, बैंकिंग, डाक तथा परिवहन सेवाओं में बुधवार को भी बाधाएं आने की आशंकाएं हैं।


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