क्रेडिट लिंक सब्सिडी स्कीम को 1 साल के लिए बढ़ाया है तो वहीं दूसरी ओर अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स को भी 12 प्रतिशत जीएसटी स्लैब से घटाने की तैयारी कर रही है।
इस साल मोदी सरकार कई तरह के लाभ देने के लिए अग्रसर है। एक ओर सरकार ने जहां क्रेडिट लिंक सब्सिडी स्कीम को 1 साल के लिए बढ़ाया है तो वहीं दूसरी ओर अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स को भी 12 प्रतिशत जीएसटी स्लैब से घटाने की तैयारी कर रही है। इस बात की जानकारी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में दिए अपने इंटरव्यू में बताया।
अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट को 12 से 5 के स्लैब में लाने की तैयारी
बता दें कि कुछ दिनों में होने वाली जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में घर खरीदारों को बड़ी राहत मिल सकती है। सरकार चाहती है कि अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट को जीएसटी की 12 प्रतिशत स्लैब से घटाकर 5 प्रतिशत की स्लैब में रखा जाए। फिलहाल, सरकार रेस्टोरेंट की तरह ही अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट पर इनपुट टैक्स क्रेडिट बंद कर सकती है, क्योंकि इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा बिल्डर्स ग्राहकों को नहीं दे रहे।
क्रेडिट लिंक सब्सिडी योजना 1 साल और बढ़ी
इसके साथ-साथ सरकार ने प्रधानमंत्री जन आवास योजना के तहत मिलने वाली क्रेडिट लिंक सब्सिडी योजना को भी एक साल के लिए बढ़ाया है। 2016 में लांच की गई प्रधानमंत्री आवास योजना की डेडलाइन को मार्च 2019 रखा गया था। इसके तहत सरकार एक निश्चित इनकम ग्रुप में आने वाले परिवारों को होमलोन पर सब्सिडी दे रही है। अभी सरकार अलग-अलग इनकम ग्रुप के हिसाब से 2.67 लाख रुपए तक की सब्सिडी देती है। होने वाली जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में सीमेंट पर जीएसटी की दरें भी घटाई जा सकती हैं।
बिल्डर्स की चाह
फिलहाल, बिल्डर्स भी चाहते हैं कि बड़े शहरों में जमीन की कीमत प्रोजेक्ट के 50 प्रतिशत तक तय हो। अभी पूरे देशभर में घर की लागत में 33 प्रतिशत जमीन की कीमत मानी जाती है। जमीन की कीमत फ्लैट के 70 प्रतिशत तक होती है जिसकी वजह से छोटे शहरों के मुकाबले बड़े शहरों में जीएसटी का अतिरिक्त भार पड़ता है।
2022 तक सबको मिले घर
सरकार का लक्ष्य है 2022 तक सबको घर देने का। तो वहीं रियल एस्टेट सेक्टर भी मंदी की मार झेल रहे हैं ऐसे में सभी कमद रियल एस्टेट सेक्टर में एक बार फिर जान फूंक सकते हैं।


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