यहां पर आपको बताएंगे कि क्रूड की गिरती कीमतों के जितना पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्यों नहीं गिर रही हैं।
एक समय था जब पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही थीं, जिसकी वजह क्रूड या कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को माना जा रहा था, लेकिन अब जब क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से घट रहीं हैं तो पेट्रोल-डीजल के दाम उसी तेजी से क्यों नहीं घट रहे हैं यह सवाल आज सबके जेहन में है। ऐसा नहीं है कि पेट्रोल-डीजल के दाम कम नहीं हो रहे हैं तेल के दामों पिछले एक महीने से लगातार कटौती होने से आम लोगों को राहत मिली है लेकिन पेट्रोल की कीमतें उस हिसाब से कम नहीं हो रही हैं जिस हिसाब से क्रूड की कीमतें गिर रही हैं।

पिछले 1.5 महीने में क्रूड 30 प्रतिशत तक नीचे आ चुका है। यहीं नहीं रुपया भी एक महीने में 5 प्रतिशत मजबूत हुआ है लेकिन पेट्रोल में सिर्फ 9.5 प्रतिशत और डीजल में सिर्फ 6.5 प्रतिशत की राहत दिख रही है। तो ऐसे में सवाल यह उठता है कि अब कौन पेट्रोल-डीजल की कीमतों की तेजी से गिरने नहीं दे रहा है।
किसी के अनुसार तेल कंपनियां क्रूड के 15 दिन के रोलिंग एवरेज पर दाम तय करती हैं तो कोई कहता है कि कंपनियां अभी अपना नुकसान पूरा कर रही हैं। वो नुकसान जो 4 अक्टूबर को दी गई 1 रुपए की राहत की वजह से हुआ है।
एक्सपर्ट का मानना है कि क्रूड और पेट्रोल की कीमतों में सीधा रिश्ता नहीं है। क्रूड के 15 दिन के औसत का फॉमूला लागू है। 15 दिन के औसत वाले फॉर्मूले से दाम घटने में देरी हो रही है। पेट्रोल, डीजल के दाम कुछ दिन में कम होंगे।
सस्ते क्रूड का असर 15 दिन के बाद दिखेगा। तो वहीं कुछ जानकार 15 दिन वाली बात नहीं मानते। इनका कहना है कि कंपनियां अपना घाटा कम कर रही हैं। अक्टूबर से दी गई 1 रुपए प्रति लीटर राहत की अब वसूली जा रही है।


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