RBI की बैठक आज , उर्जित पटेल ले सकते हैं एक बड़ा फैसला

यहां पर आपको आरबीआई की बोर्ड मीटिंग में होने वाली बैठक में जिन बातों पर चर्चा होगी उसके बारे में बताएंगे।

आज भारतीय रिजर्व बैंक बोर्ड की एक अहम बैठक होने वाली है यह बैठक एक ऐसे मौके पर हो रही है, जब ऐसी रिर्पोट आ रही हैं कि सरकार ने देश के केंद्रीय बैंक की कड़ी निगरानी को सक्षम बनाने के लिए नियमों में बदलाव का प्रस्‍ताव दिया है। सरकार और आरबीआई के बीच टकराव जारी है। सरकार ने 2019 के आम चुनावों से पहले RBI पर दबाव बढ़ा दिया है। उम्‍मीद की जा रही है कि सरकार द्वारा नामित बोर्ड सदस्‍य पॉलिसी में बदलाव के लिए बैंक पर दबाव बना सकते हैं। तो दूसरी आशंका यह भी है कि आज आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल अपने पद से इस्‍तीफा भी देने का फैसला ले सकते हैं।

इसके अलावा रिर्पोट के अनुसार सोमवार को रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल की होने वाली बैठक में दोनों पक्ष कुछ मुद्दों पर आपसी सहमति पर पहुंचने के पक्ष में हैं।

RBI के पास उपलब्‍ध कोष पर चर्चा

RBI के पास उपलब्‍ध कोष पर चर्चा

बैठक में वित्‍त मंत्रालय के नामित निदेशक और कुछ स्‍वतंत्र निदेशक गवर्नर उर्जित पटेल और उनकी टीम पर MSME को कर्ज से लेकर केंद्रीय बैंक के पास उपलब्‍ध कोष को लेकर अपनी बात रख सकते हैं। रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल भी इस्‍तीफे का कुछ वर्गों के दबाव के बावजूद इस्‍तीफा देने के बजाय बैठक में केंद्रीय बैंक की नीतियों का मजबूती से पक्ष रख सकते हैं।

एनपीए को लेकर हो सकता है बचाव

एनपीए को लेकर हो सकता है बचाव

उर्जित पटेल बैठक में NPA को लेकर केंद्रीय बैंक की कड़ी नीतियों का बचाव कर सकते हैं। रिर्पोट के अनुसार गैर-निष्‍पादित परिसंपत्ति के प्रावधानों को लेकर गवर्नर पटेल के साथ में चार डिप्‍टी गवर्नर संयुक्‍त पक्ष रखेंगे और इन्‍हें कुछ स्‍वतंत्र निदेशकों का समर्थन मिलने का भी अनुमान है।

आरबीआई के निर्णय लेने में वृहद भागीदारी

आरबीआई के निर्णय लेने में वृहद भागीदारी

बैठक में सरकार RBI के निर्णय लेने में वृहद भागीदारी चाहती है क्‍योंकि उसका मानना है कि मौजूदा चलन एक दिन की देरी के चलते ऋण के एनपीए में तब्‍दील होने जैसे कई महत्‍वपूर्ण मुद्दों पर उसे अलग रखता है। सरकार का मानना है कि लोगों के प्रतिनिधि होने के नाते उसे आरबीआई के महत्‍वपूर्ण नीति निर्णयों में शामिल होना चाहिए।

सार्वजनिक बैंक

सार्वजनिक बैंक

21 सार्वजनिक बैंकों में से 11 बैंक PCA के दायरे में हैं। जिससे उन पर नए कर्ज देने को लेकर कड़ी शर्तें लागू हैं। इन बैंकों में इलाहाबाद बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, कॉरर्पोरेशन बैंक, IDBI बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, देना बैंक और बैंक ऑफ महाराष्‍ट्र शामिल हैं।

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